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सिरोही-सिरोही जिला अस्पताल में गुरुवार को ऑपरेशन थिएटर में 65 वर्षीय इंद्रमल लोहार की मौत हो गई। जालौर जिले के सियाणा गांव निवासी इंद्रमल को पैर में मामूली फ्रैक्चर के ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया गया था।
परिजनों का आरोप है कि एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाते ही उन्हें हार्ट अटैक आया और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उनकी जान चली गई। सुबह करीब 11:45 बजे उन्हेंकारण उनकी जान चली गई। सुबह करीब 11:45 बजे उन्हें ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया था और दोपहर 12:55 बजे बाहर लाया गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और इलाज में लापरवाही बरतने के साथ करीब 70 मिनट तक ओटी में रखने के दौरान की जानकारी नहीं देने के आरोप लगाए। बाद में कोतवाली पुलिस में रिपोर्ट देकर संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
वहीं, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र महात्मा ने बताया कि एनेस्थीसिया की सुई लगाते ही बुजुर्ग को अटैक आया। ऑपरेशन शुरू भी नहीं हुआ था। उन्हें बचाने के प्रयास किए गए, लेकिन उनकी मौत हो गई।
सीढ़ियों से गिरने पर हुआ था पैर में फ्रैक्चर
परिजनों के अनुसार, इंद्रमल लोहार 11 अक्टूबर को घर में सीढ़ियों से गिर गए थे। इससे उनके पैर में हल्का फ्रैक्चर हो गया था। उपचार और ऑपरेशन के लिए उन्हें सिरोही जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। गुरुवार सुबह करीब 11:45 बजे उन्हें ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। करीब 70 मिनट बाद दोपहर 12:55 बजे जब उन्हें बाहर लाया गया, तो उनकी मौत हो चुकी थी। अस्पताल की ओर से परिजनों को बताया गया कि एनेस्थीसिया देने के बाद उन्हें हार्ट अटैक आया था।परिजनों का सवाल- 70 मिनट तक ओटी में क्या हुआ?
इंद्रमल के पुत्र ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पिता के पैर में मामूली फ्रैक्चर था और छोटा-सा ऑपरेशन होना था। इसके बावजूद उन्हें करीब एक घंटा 10 मिनट तक ऑपरेशन थिएटर में रखा गया। परिजनों ने सवाल उठाया कि इस दौरान डॉक्टरों ने क्या किया और उन्हें समय पर जानकारी क्यों नहीं दी गई। उनका आरोप है कि न तो इलाज की स्थिति बताई गई और न ही इतनी देर तक ओटी में रखने का कारण समझाया गया।
परिजनों ने कहा कि यदि उन्हें पहले स्थिति की जानकारी होती, तो वे अपने पिता को इलाज के लिए गुजरात ले जाते। उनका कहना था कि अब कार्रवाई का आश्वासन देने से उनके पिता वापस नहीं आ सकते। घटना के बाद परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच करीब 25 मिनट तक बहस भी हुई।
पीएमओ बोले- एनेस्थीसिया की सुई लगते ही आया अटैक
प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र महात्मा ने बताया कि इंद्रमल 11 अक्टूबर को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे। उन्हें शुगर और ब्लड प्रेशर की समस्या भी थी। गुरुवार को उनका ऑपरेशन किया जाना था। लोकल एनेस्थीसिया देने के लिए जैसे ही सुई लगाई गई, उन्हें अटैक आ गया। इस कारण ऑपरेशन शुरू भी नहीं हो पाया।डॉ. महात्मा के अनुसार, बुजुर्ग को बचाने के लिए उपचार के प्रयास किए गए और बाद में आईसीयू में भर्ती कर उनका इलाज किया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
पुलिस में रिपोर्ट, कार्रवाई की मांग
घटना के बाद परिजनों ने कोतवाली पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराकर संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हंगामे की सूचना पर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र महात्मा भी अस्पताल पहुंचे और परिजनों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि परिजन अपनी शिकायत दें, मामले में जो भी आवश्यक होगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। परिजनों ने पूरे घटनाक्रम की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।




