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*वास्तविक क्षमायाचना उससे करो, जिसका दिल दुखाया हो: आचार्य लब्धिवलभसुरी*
सिरोही 10 सितम्बर2026,
सिरोही जिले में तेरह सौ वर्ष प्राचीन श्री 108 हमीरपुरा पार्श्वनाथ जैन तीर्थ मीरपुर में चातुर्मास में निश्रा प्रदान करने वाले युवाचार्य श्री लब्धिवलभसूरीजी म. सा. ने पर्युषण महापर्व पर श्रावक श्राविकाओं के 11 कर्तव्यों के बारे में प्रवचन करते हुऐ कहा कि वर्ष भर में आपने मन, वचन ओर काया से उस व्यक्ति से जिसका हमने जाने अनजाने में दिल दुखाया हो उससे अंतःकरण से मिच्छामी दुक्कड़म बोलकर दिल से क्षमायाचना करनी चाहिए। यह क्षमायाचना व्यक्ति के पास जाकर या बुलाकर की जानी चाहिए। व्हाटशाप या डिजिटल रूप से की गई क्षमायाचना वास्तव में एक तरह से दिखावा हैं।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म में वार्षिक 11 कर्तव्यों का उल्लेख शास्त्रों में उल्लेखित हैं ओर इनका पालन कर हमें अपना जीवन निर्मल बनाना चाहिए इससे शासन प्रभावना भी होगी ।ग्यारह कर्तव्यों में संघ पूजन, साधर्मिक भक्ति, चैत्य परिपाटी, स्नात्र महोत्सव, देवद्रव्य वृद्धि, महापूजन, रात्रि जागरण, श्रुत भक्ति/ज्ञान पूजा, उद्यापन/उजमणा, तीर्थ प्रभावना एवं आलोचना/प्रायश्चित करना भी शामिल हे। इनका निर्वहन श्रद्धा के साथ करना हर श्रावक श्राविका का प्रमुख कर्तव्य है। इस महापर्व पर वर्ष भर में किए गए पापों का प्रायश्चित करना भी एक जरूरी क्रिया है।
इस महापर्व के तीसरे दिन सभी आराधकों ने श्री 108 हमीरपुरा पाश्र्वनाथ का अभिषेक ओर केसर पूजा कर साधना की। अनेक आराधक आयंबिल की तपस्चर्या कर रहे है। रात्रि में आराधकों ने प्रभु भक्ति का आनंद लिया।


