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सोजत। सोजत के नरसिंहद्वारा के महंत नरसिंहदास महाराज का शनिवार सुबह 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनके निधन की खबर मिलते ही नरसिंहद्वारा में शिष्यों, संतों और श्रद्धालुओं का तांता लग गया।
श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर संत को भावभीनी अंतिम विदाई दी। शनिवार शाम उनकी बैकुंठ यात्रा निकाली गई और विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
महंत नरसिंहदास महाराज को वर्ष 2005 में नरसिंहद्वारा का महंत बनाया गया था। उन्होंने लंबे समय तक धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का नेतृत्व किया। उनका एक आश्रम माउंट आबू में भी संचालित है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनसे जुड़े रहे।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई अंतिम विदाई
शनिवार शाम 4 बजे नरसिंहद्वारा से महंत नरसिंहदास महाराज की बैकुंठ यात्रा रवाना हुई। इससे पहले विभिन्न संतों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उनकी पार्थिव देह का स्नान कराया गया और अंतिम संस्कार से पूर्व की धार्मिक रस्में संपन्न की गईं।
संत की पार्थिव देह को बैकुंठी में विराजमान कर फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया।
हरिनाम संकीर्तन के बीच निकली बैकुंठ यात्रा
बैकुंठ यात्रा नरसिंहद्वारा से शुरू होकर धोलीवाड़ी बास, सेवगो का बास, धानमंडी, सब्जीमंडी, मुख्य बाजार, राजपोल गेट, महावीर सर्किल, मेला चौक और बागेलाव होते हुए सिनेमा के पीछे स्थित बेरा रामसागर पहुंची। यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में ‘हरिनाम संकीर्तन’ और धार्मिक जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
संतों और श्रद्धालुओं की रही बड़ी मौजूदगी
बेरा रामसागर पर धार्मिक विधि-विधान के साथ महंत नरसिंहदास महाराज का अग्नि संस्कार किया गया। इस अवसर पर संत गोपालदास महाराज, बालकदास महाराज, अर्जुनदास महाराज, पुखराजपुरी महाराज, वैशाखपुरी महाराज, शत्रुघ्नदास महाराज, देवीदास महाराज, रामाज्ञादास महाराज और रोहट के बालकदास महाराज सहित अनेक संत उपस्थित रहे।
बैकुंठ यात्रा में समाजसेवी छगनलाल वैष्णव, कैलाश दवे, पुष्पतराज मुणोत, जगदीश पाराशर, ओमनारायण पाराशर, पदमचंद टांक, सुरेश पंवार, हनुमानदास, जितेंद्रदास वैष्णव, रमेशदास वैष्णव, ओमप्रकाश टांक, सत्यनारायण टांक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और मातृशक्ति ने भी भाग लेकर संत को श्रद्धांजलि अर्पित की।

