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माउंट आबू-पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू में मानसून एक बार फिर तेज हो गया है। लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण सूख रहे पानी के स्रोतों में अब उम्मीद जगी है।
शनिवार शाम को हुई तेज बारिश के बाद नक्की झील पर चादर चलने लगी। हालांकि, यह झील अगस्त में ही पूरी तरह भर चुकी थी।
माउंट आबू का मुख्य पेयजल स्रोत 59 फीट की क्षमता वाला लोअर कोदरा डैम अभी भी 41 फीट ही भरा है। यह डैम करीब 18 फीट खाली है।
इसी तरह 33 फीट की क्षमता वाला अपर कोदरा डैम भी अभी 15 फीट भरा है। यह भी 18 फीट खाली है। बीते तीन महीनों में यहां केवल 50 प्रतिशत ही बारिश ही हुई है।
माउंट आबू के मुख्य पेयजल स्रोत लोअर कोदरा डैम और अपर कोदरा डैम के इतना खाली होने से स्थानीय लोगों में पानी की सप्लाई को लेकर अभी भी चिंता बनी हुई है।
शनिवार देर शाम हुई बारिश के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद है। उनका मानना है कि मानसून के बचे हुए समय में अगर अच्छी बारिश होती है, तो पानी की समस्या कम होगी।


