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जालोर-जालोर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सड़क दुर्घटना में मौत से जुड़े बीमा क्लेम मामले में फैसला सुनाया है। आयोग ने ईफ्को टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को परिवादिया प्रवीणा देवी को 15 लाख रुपए की बीमा राशि देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही परिवाद दायर करने की तारीख से भुगतान तक 9% सालाना ब्याज और मानसिक संताप और परिवाद व्यय के लिए 1.10 लाख रुपए देने के निर्देश दिए हैं।
परिचित की मोटरसाइकिल लेकर गए थे
परिवाद के अनुसार, प्रवीणा देवी के पति स्वर्गीय रामकरण दमामी ने उपभोक्ता आयोग के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया था। उन्होंने बताया कि 8 सितंबर 2024 को वे अपने परिचित परिवार की मोटरसाइकिल निजी काम के लिए लेकर गए थे। अगले दिन 10 सितंबर 2024 को मोटरसाइकिल लेकर लौटते समय वे भाद्राजून के पास कुआराड़ा क्षेत्र में पहुंचे।
इसी दौरान सामने से तेज गति और लापरवाही से आ रही दूसरी मोटरसाइकिल से उनकी टक्कर हो गई। हादसे में रामकरण गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
पॉलिसी में चालक की मौत पर 15 लाख रुपए का कवर
प्रकरण में संबंधित मोटरसाइकिल का बीमा ईफ्को टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया था। वाहन मालिक के परिचित होने के कारण रामकरण मोटरसाइकिल लेकर गए थे। बीमा पॉलिसी में दुर्घटना के कारण चालक की मृत्यु होने पर 15 लाख रुपए तक की जोखिम राशि का उल्लेख था।
वाहन मालिक की मृत्यु नहीं होने का हवाला देकर क्लेम फॉर्म देने से इनकार
परिवादिया के अनुसार, दुर्घटना की सूचना देने और बीमा क्लेम की प्रक्रिया पूरी करने के लिए संपर्क किया गया तो बीमा कंपनी ने क्लेम फॉर्म देने से इनकार कर दिया। कंपनी की ओर से कहा गया कि वाहन के पंजीकृत मालिक की मृत्यु नहीं हुई है।
इसके बाद परिवादिया ने 18 जून 2025 को बीमा कंपनी को कानूनी नोटिस भेजकर बीमा राशि की मांग की, लेकिन राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद प्रवीणा देवी ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया। इसमें बीमा क्लेम की राशि के साथ मानसिक पीड़ा के मुआवजे और परिवाद व्यय दिलाने की मांग की गई।
15 लाख रुपए के साथ 9% सालाना ब्याज देने का आदेश
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जालोर के पीठासीन अधिकारी धनश्याम यादव और सदस्य निरंजन शर्मा ने मामले में निर्णय सुनाया। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह परिवादिया को 15 लाख रुपए की बीमा राशि अदा करे। इस राशि पर परिवाद दायर करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
इसके अतिरिक्त मानसिक संताप और आर्थिक क्षति के लिए एक लाख रुपए तथा परिवाद व्यय के लिए 10 हजार रुपए देने का आदेश दिया गया। इस तरह बीमा राशि और अतिरिक्त मुआवजे व खर्च के रूप में कंपनी को कुल 16 लाख 10 हजार रुपए के अलावा निर्धारित ब्याज का भुगतान करना होगा।




