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समय पर उपचार से बची दो जिंदगियां,बाली जिला अस्पताल में हाई-रिस्क गर्भवती को मिला जीवनदान, मां और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित
बाली (पाली)। चिकित्सा विभाग की त्वरित कार्रवाई, 104 एम्बुलेंस सेवा की तत्परता एवं बाली जिला अस्पताल के चिकित्सकों की संवेदनशील कार्यशैली ने एक हाई-रिस्क गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की जान बचाकर मानव सेवा की मिसाल पेश की है।
जानकारी के अनुसार नवली पत्नी गोविंद राम जोगियों, निवासी तालाब गुमान (जिला उदयपुर), जो आदिवासी क्षेत्र की रहने वाली हैं, खेत में मजदूरी के दौरान अत्यधिक कमजोरी की हालत में थीं। इसी दौरान समाजसेवी आसिफ खान नायक ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हितेन्द्र पी. वागोरिया को सूचना दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. हितेन्द्र पी. वागोरिया ने तुरंत ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी मोहम्मद अजहरुद्दीन को आवश्यक निर्देश दिए। मोहम्मद अजहरुद्दीन ने बिना विलंब 104 एम्बुलेंस सेवा की व्यवस्था करवाई तथा महिला को शीघ्र बाली जिला अस्पताल पहुंचाने और भर्ती से लेकर उपचार तक समन्वय बनाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बाली जिला अस्पताल में पीएमओ एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत टेलर ने तत्काल जांच एवं सोनोग्राफी करवाई। जांच में महिला 32 सप्ताह की गर्भवती पाई गई तथा उसका हीमोग्लोबिन मात्र 6 ग्राम पाया गया, जो मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए अत्यंत गंभीर स्थिति थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉ. भरत टेलर एवं मेडिकल टीम ने तुरंत ब्लड ट्रांसफ्यूजन शुरू कर महिला को विशेषज्ञ निगरानी में भर्ती किया। समय पर उपचार मिलने से महिला के स्वास्थ्य में सुधार है तथा मां और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित हैं। चिकित्सकों का प्रयास है कि हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार होने के बाद सुरक्षित एवं सफल प्रसव कराया जाए।
महिला पहले से दो बच्चों की मां है। उपचार के दौरान ब्लॉक हेल्थ सुपरवाइजर प्रेम प्रकाश ने परिवार को परिवार कल्याण संबंधी परामर्श दिया। समाजसेवी आसिफ खान नायक की समझाइश पर परिवार ने प्रसव के बाद स्थायी परिवार नियोजन (नसबंदी) अपनाने की सहमति भी दी।
यह घटना दर्शाती है कि समय पर पहचान, त्वरित सूचना, प्रभावी समन्वय, 104 एम्बुलेंस सेवा तथा चिकित्सकों की समर्पित कार्यशैली से गंभीर परिस्थितियों में भी मां और गर्भस्थ शिशु का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है।
कैप्शन:
बाली जिला अस्पताल में भर्ती हाई-रिस्क गर्भवती महिला का ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान उपचार किया गया। चिकित्सा विभाग की त्वरित कार्रवाई, 104 एम्बुलेंस सेवा एवं चिकित्सकीय टीम के समन्वित प्रयासों से मां और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित हैं।

