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सिरोही-होली से आठ दिन पूर्व शुरू होने वाले होलाष्टक और शीतला सप्तमी तक रहने वाले अंगता के कारण 24 फरवरी से 10 मार्च तक कुल 15 दिन शुभ कार्यों पर रोक रहेगी। ज्योतिषाचार्य आचार्य प्रदीप दवे के अनुसार फाल्गुन शुक्ला अष्टमी (24 फरवरी) से फाल्गुन पूर्णिमा (3 मार्च 2026) तक होलाष्टक रहेगा।
इसके बाद चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (4 मार्च) से शीतला सप्तमी (10 मार्च 2026) तक माताजी का अंगता माना जाएगा। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, देव प्रतिष्ठा सहित अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। भारतीय ज्योतिष एवं स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इन दिनों ग्रहों की स्थिति शिथिल मानी जाती है, जिससे शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है।
क्या होता है होलाष्टक ? : होली से पूर्व के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। यह फाल्गुन शुक्ला अष्टमी से पूर्णिमा तक रहता है।
मान्यता है कि इस दौरान ग्रहों का प्रभाव अनुकूल नहीं होता, इसलिए मांगलिक कार्य टाले जाते हैं।शीतला माता को अर्पित होता है ठंडा प्रसाद : परंपरा के अनुसार शीतला सप्तमी पर ठंडा भोजन बनाकर माता को अर्पित किया जाता है। पहले चेचक का प्रकोप अधिक होने के कारण लोग शीतला और ओरी माता की आराधना कर रोगों से रक्षा की कामना करते थे। यही परंपरा आज भी श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है। क्या है अंगता की परंपरा? महत्वपूर्ण कार्य स्थगित रखते स्थानीय भाषा में ‘अंगता’ का अर्थ है ‘रोक’। होली दहन के बाद शीतला सप्तमी तक शीतला माता और ओरी माता की पूजा की परंपरा है। चेचक जैसी बीमारियों से बचाव की मान्यता के चलते इस अवधि में महत्वपूर्ण कार्य स्थगित रखे जाते हैं। महिलाएं माताजी के भजन-गीत गाती हैं और पूजा-अर्चना करती हैं। विवाह, गृह प्रवेश व अन्य मांगलिक कार्य रहेंगे स्थगित

