• April 30, 2026

तखतगढ-पुराना खिवांदी मार्ग स्थित खेतो मे फराली जलाने के दौरान अचानक लगी आग ने देखते ही देखते लिया विकराल रूप धारण

PALI SIROHI ONLINE

खीमाराम मेवाडा

पुराना खिवांदी मार्ग स्थित खेतो मे फराली जलाने के दौरान अचानक लगी आग ने देखते ही देखते किया विकराल रूप धारण

दमकल कर्मी लगातार आग बुझाने के कर रहे प्रयास लेकिन तेज हवा आग पर काबू पाने में बन रही बड़ी चुनौती

तखतगढ़ 30 अप्रेल (खीमाराम मेवाडा) जवाई कमांड क्षेत्र मे पीचले 20 दिनो से जब से खेतो से गैहु फसल कटाई के बाद किसानो द्वारा हर रोज कही न कही फराली जलाने का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा। ऐसे मे इस भीषण गर्मी के साथ साथ लाखो- करोडो जीव जन्तु आग की भेट चढते जा रहे है। लेकिन प्रशासन भी इस और कोई ध्यान केंद्रित नही कर रहा। ठीक ऐसा ही नजारा गुरूवार को पुराना खिवांदी मार्ग स्थित खेतों में देखने को मिला जहा गेहूं की पराली जलाने के दौरान अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। तेज हवा के कारण आग तेजी से फैलती हुई आसपास के खेतों, झाड़ियों और वनस्पति क्षेत्र तक पहुंच गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार खेतों में पराली जलाने के दौरान आग नियंत्रण से बाहर हो गई और हवा के रुख के साथ तेजी से आगे बढ़ने लगी। आग की लपटें दूर-दूर तक दिखाई देने लगीं, जिससे आसपास के किसानों और ग्रामीणों में भय का माहौल पैदा हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही तखतगढ़ पालिका का अग्निशमन वाहन मौके पर पहुंचा। दमकल कर्मी लगातार आग बुझाने के प्रयास में जुटे हुए हैं, लेकिन तेज हवा आग पर काबू पाने में बड़ी चुनौती बन रही है। आग कई खेतों की मेड़ों, सूखी झाड़ियों और हरे पेड़-पौधों को अपनी चपेट में ले चुकी है, जिससे वनस्पति को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

ग्रामीणों ने भी अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग की तीव्रता और हवा की रफ्तार के कारण स्थिति लगातार गंभीर बनी रही। खेतों में लगी आग के चलते आसपास के क्षेत्र में धुएं का गुबार फैल गया, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

गौरतलब है कि फसल कटाई के बाद कई किसान खेत साफ करने के उद्देश्य से पराली जलाते हैं, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही और मौसम की अनुकूल परिस्थितियां आग को भयावह बना देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि ऐसी घटनाएं किसानों की मेहनत और प्राकृतिक संपदा दोनों के लिए खतरा बन जाती हैं।

प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पराली जलाने से बचें और खेतों की सफाई के लिए सुरक्षित एवं वैकल्पिक तरीकों को अपनाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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