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खीमाराम मेवाडा
52 वर्षों से तखतगढ़ में एससी-एसटी को नहीं मिला पालिकाध्यक्ष बनने का अवसर, आरक्षण रोटेशन पर उठे सवाल
तखतगढ़ 18 जुलाई (खीमाराम मेवाडा) वर्ष 1974 में ग्राम पंचायत से नगरपालिका में क्रमोन्नत हुए तखतगढ़ नगर में पिछले लगभग 52 वर्षों के नगरीय निकाय चुनावों के इतिहास को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगरपालिका गठन के बाद से आज तक एक भी बार पालिकाध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति (एससी) अथवा अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित नहीं किया गया।
यदि यह तथ्य सरकारी अभिलेखों से भी प्रमाणित होता है, तो यह सामाजिक न्याय, समान प्रतिनिधित्व तथा आरक्षण की रोटेशन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243T तथा राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के अनुसार नगरीय निकायों में अध्यक्ष पदों का आरक्षण विभिन्न वर्गों के लिए रोटेशन प्रणाली के आधार पर किया जाता है, ताकि प्रत्येक पात्र वर्ग को समय-समय पर नेतृत्व का अवसर मिल सके।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि संविधान का मूल उद्देश्य सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करना है। इसी भावना के अनुरूप कानून का भी सभी निकायों में समान रूप से पालन होना चाहिए। यदि प्रदेश की अन्य नगरपालिकाओं में रोटेशन प्रणाली के तहत एससी एवं एसटी वर्ग को अध्यक्ष पद का अवसर मिला है, तो तखतगढ़ नगर पालिका में पांच दशक से अधिक समय तक ऐसा अवसर नहीं मिलना गंभीर समीक्षा का विषय है।
नागरिकों का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और उसका समान रूप से पालन होना चाहिए। यदि किसी नगर निकाय में आरक्षण की रोटेशन व्यवस्था का लाभ लगातार किसी वर्ग को नहीं मिल पाता, तो संबंधित अभिलेखों एवं प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार, स्वायत्त शासन विभाग तथा राज्य निर्वाचन आयोग से मांग की है कि वर्ष 1974 से अब तक तखतगढ़ नगर पालिका के पालिकाध्यक्ष पद के आरक्षण का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि एससी एवं एसटी वर्ग को अब तक अध्यक्ष पद का अवसर क्यों नहीं मिला। साथ ही आगामी नगरीय निकाय चुनावों में आरक्षण निर्धारण करते समय संविधान, राजस्थान नगरपालिका अधिनियम तथा रोटेशन प्रणाली की भावना के अनुरूप पारदर्शी एवं न्यायसंगत निर्णय सुनिश्चित किया जाए।

