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खीमाराम मेवाडा
तखतगढ़ में जनसमस्याओं का अंबार, आखिर जनता को कब मिलेगी राहत
तखतगढ 11 अक्टूबर (खीमाराम मेवाडा) तखतगढ़ नगर में बढती मुख्य रूप से पेयजल जैसी जनसमस्याओं से आखिर जनता को राहत कब मिलेगी। अब राजनीति करने का समय नही आगामी गर्मीयो के मधयनजर आमजन को राहत देने का है।दरअसल
1974 में स्थापित नगरपालिका दशकों तक भाजपा का ही स्थानीय शासन चलता आ रहा है। लेकिन आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तखतगढ़ वासी संघर्ष करने को मजबूर है।
तखतगढ़ नगरपालिका के गठन के बाद लगभग 45 वर्षों तक अधिकांश समय स्थानीय सत्ता पर भाजपा का कब्जा रहा। इसके बावजूद आज कस्बे में पेयजल, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं आमजन के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं।
पेयजल समस्या की कहानी भी तखतगढ़ की राजनीतिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कि वर्ष 2010 से 2015 के दौरान जब तखतगढ़ में प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से कांग्रेस का बोर्ड बना और राज्य में भी कांग्रेस की सरकार थी। उस दरम्यान तत्कालीन पर्यटन मंत्री श्रीमती बीना काक के प्रयासों से तखतगढ़ कस्बे को जवाई बांध आधारित पेयजल योजना से जोड़ने की पहल हुई। यह कस्बे के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। जिससे लोगों को बेहतर पेयजल उपलब्ध होने की उम्मीद जगी थी। लेकिन योजना की प्रक्रिया पूरी होने तक राज्य में सत्ता परिवर्तन हो गया और भाजपा की सरकार बन गई। उस समय स्थानीय विधायक मदन राठौड़ थे। आरोप है कि योजना का लोकार्पण तो कर दिया गया। लेकिन पेयजल वितरण व्यवस्था को इस तरह संचालित नहीं किया गया कि कस्बे के सभी वार्डों को समान रूप से लाभ मिल सके।
स्थानीय लोगों की शिकायत रही है। कि जवाई बांध के पानी के वितरण में भेदभाव हुआ। आरोपों के अनुसार, भाजपा समर्थित माने जाने वाले मोहल्लों को जवाई बांध के पानी से जोड़ दिया गया। जबकि कांग्रेस समर्थित माने जाने वाले कई वार्डों के लोगों को खारे पानी पर निर्भर रहने के लिए छोड़ दिया गया। मगर आज भी सवाल वही है। कि जब जवाई बांध से पेयजल उपलब्ध कराने की योजना बनी तो तखतगढ़ के प्रत्येक वार्ड और प्रत्येक परिवार को उसका समान लाभ क्यों नहीं मिला। कस्बे के कई परिवार आज भी बेस्वाद और लवणीय पानी पीने को मजबूर हैं। यह केवल पानी की समस्या नहीं, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य, समानता और बुनियादी नागरिक सुविधाओं से जुड़ा गंभीर विषय है। जनता यह जानना चाहती है कि दशकों तक स्थानीय शासन की जिम्मेदारी संभालने वालों ने पेयजल वितरण व्यवस्था को सर्वसुलभ बनाने के लिए क्या किया। जिन योजनाओं से पूरे कस्बे को राहत मिलनी चाहिए थी, उनका लाभ प्रत्येक वार्ड तक सुनिश्चित क्यों नहीं हुआ। अब तखतगढ़ को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए। तखतगढ जनता की मांग है। वर्तमान यह व्यवस्था जन अभियांत्रिक विभाग के अधिन है। जो नगर पालिका से समन्वयक दोनो विभाग जवाई बांध आधारित पेयजल योजना के अंतर्गत सभी वार्डों में जलापूर्ति की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जाए, पेयजल की गुणवत्ता की जांच हो तथा जिन क्षेत्रों में आज भी खारा पानी मिल रहा है, वहां शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए। क्योंकि पेयजल किसी पार्टी का नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
तखतगढ़ की जनता को अब आश्वासन नहीं, जवाबदेही और राहत चाहिए।




