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खीमाराम मेवाडा
भाजपा बोर्ड की नाकामी साफ झलक रही है, पेयजल व्यवस्था बनी गंभीर समस्या
तखतगढ 30 सितम्बर (खीमाराम मेवाडा) तखतगढ़ में पेयजल व्यवस्था को लेकर पूर्ववर्ती भाजपा बोर्ड का निर्णय अब कस्बेवासियों के लिए परेशानी का कारण बनता दिखाई दे रहा है। 18 सितंबर 2025 को नगरपालिका द्वारा पेयजल व्यवस्था जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) को हस्तांतरित करने का निर्णय तखतगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है।
जिस नगरपालिका ने वर्षों तक, यहां तक कि भयंकर अकाल के दौर में भी, कस्बे में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को संभाला, वही जिम्मेदारी हस्तांतरित होने के बाद पेयजल समस्या लगातार गंभीर होती गई। पहले कस्बे में एक दिन छोड़कर नियमित पेयजल सप्लाई होती थी, लेकिन अब सप्लाई का अंतर बढ़कर करीब 36 घंटे हो गया है। इससे आमजन को पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विपक्ष का आरोप है कि पिछले एक वर्ष से कैबिनेट मंत्री सहित भाजपा के जनप्रतिनिधियों द्वारा तखतगढ़ और सुमेरपुर की पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए करोड़ों रुपये के बजट और बड़ी योजनाओं की घोषणाएं की जा रही हैं, लेकिन धरातल पर उसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है।
भंवर मीना ने कहा कि जनता को घोषणाओं और बजट के आंकड़ों से ज्यादा जरूरत नियमित और पर्याप्त पेयजल की है। यदि सरकार और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि वास्तव में गंभीर हैं तो उन्हें कागजों और भाषणों से आगे बढ़कर तखतगढ़ की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए।
आज स्थिति यह है कि जिस तखतगढ़ ने कठिन अकाल के समय भी पेयजल व्यवस्था को संभाले रखा, वहां लोगों को सामान्य परिस्थितियों में भी पानी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। यह स्थिति भाजपा बोर्ड और वर्तमान सरकार की पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।




