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सिरोही-विश्व आदिवासी दिवस पर आलपा में आयोजित भील समाज के कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार संयम लोढ़ा ने भाजपा पर आदिवासी समाज के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा आदिवासियों की नंबर-1 दुश्मन है।
लोढ़ा ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में सिरोही जिला मुख्यालय पर भील समाज छात्रावास और शिवगंज में मीणा समाज छात्रावास के लिए आवंटित जमीन को राजस्थान में भाजपा सरकार आने के बाद रद्द कर दिया गया।
छात्रावास की जमीन रद्द करने पर उठाए सवाल
लोढ़ा ने बताया कि उनके कार्यकाल में सिरोही जिला मुख्यालय पर भील समाज छात्रावास और शिवगंज में मीणा समाज छात्रावास के लिए भूमि आवंटित की गई थी। उनके अनुसार, राजस्थान में भाजपा सरकार आने के बाद दोनों भूमि आवंटनों को रद्द कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि मीणा समाज ने अपने अधिकारों के प्रति सजगता दिखाते हुए इस मामले में हाईकोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया। हालांकि, भील समाज के छात्रावास की भूमि के मामले में की गई कार्रवाई को उन्होंने भाजपा सरकार की संवेदनहीनता बताया। उन्होंने कहा कि भील समाज के बच्चों की शिक्षा और भविष्य से जुड़े विषय पर भी राजनीति की जा रही है।रोवाड़ा में 50 साल से काबिज जमीन का मुद्दा उठाया
संयम लोढ़ा ने रोवाड़ा गांव में भील समाज के परिवारों से संबंधित भूमि के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस जमीन पर भील समाज के लोग करीब 50 सालों से काबिज हैं और जिसका धारा 91 में लगातार प्रकरण दर्ज हुआ है, उस जमीन का कथित मिलीभगत से एक निजी व्यक्ति के नाम नामांतरण कर दिया गया।
लोढ़ा ने बताया कि जब भील समाज के लोग यह मामला उनके पास लेकर आए तो उन्होंने संबंधित तहसीलदार से बात की। उनके अनुसार, तहसीलदार ने भी स्वीकार किया था कि इस मामले में गलत हुआ है।
अधिकारों के लिए जागरूक और संगठित होने का आह्वान
लोढ़ा ने कहा कि भील समाज के लोगों के साथ इस तरह के अत्याचार और अन्याय को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है। समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित रहने की जरूरत है, ताकि कोई भी उनके अधिकारों का हनन नहीं कर सके।बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील
लोढ़ा ने भील समाज में शिक्षा की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जिले के विभिन्न स्थानों पर आदिवासी समाज की बालिकाओं के लिए छात्रावास और अध्ययन की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जहां बच्चियां सरकारी खर्चे पर शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि सिरोही, शिवगंज और कोलर में भील समाज की बच्चियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। समाज में जागरूकता की कमी के कारण इन तीनों स्थानों पर भील समाज की एक भी बच्ची अध्ययन नहीं कर रही है।
उन्होंने समाज के लोगों से बच्चों, विशेषकर बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के जरिए समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकता है।
सबरी माता और राणा पूंजा का किया स्मरण
लोढ़ा ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने सबरी माता और वीर राणा पूंजा के उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय इतिहास में आदिवासी समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने देश और समाज के लिए हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समाज के युवाओं को अपने इतिहास, महापुरुषों और गौरवशाली परंपराओं को जानने के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा से भी जुड़ना चाहिए।
कुरीतियां दूर कर आगे बढ़ने का संदेश
लोढ़ा ने कहा कि समाज को अपने अधिकारों के लिए जागरूक, संगठित और संघर्षशील रहना होगा। उन्होंने आदिवासी समाज से अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने तथा सामाजिक कुरीतियों को दूर कर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में भील समाज के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। आदिवासी दिवस के अवसर पर समाजजनों ने एकजुटता के साथ अपने अधिकारों, शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

