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सिरोही-मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देश पर कोतवाली पुलिस ने रामझरोखा मंदिर के महंत सीतारामदास के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश जारी होने के करीब दस दिन बाद की गई। यह प्रकरण रामझरोखा मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी नटवरलाल की ओर से दायर परिवाद के आधार पर दर्ज किया गया है।
रामझरोखा मंदिर से जुड़ा यह भूमि विवाद लंबे समय से चर्चाऔर विवाद का विषय बना हुआ है। पीडब्ल्यूडी कार्यालय से सटी मंदिर की भूमि पर नगर परिषद द्वारा पिछले वर्ष आठ पट्टे जारी किए जाने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया था। इस मुद्दे को लेकर सनातन समाज में भी लगातार नाराजगी बनी हुई थी।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि महंत सीतारामदास ने अपने गुरु महंत जयरामदास की मूल वसीयत से कथित छेड़छाड़ कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और उसी के आधार पर मंदिर की भूमि को बेच दिया। इसके अलावा उन पर रामझरोखा मंदिर, राम-लक्ष्मण मंदिर और राजगुरुद्वारा की संपत्तियों को लीज पर देने और बेचने के प्रयास करने के भी आरोप हैं।
इन्हीं आरोपों और गतिविधियों के चलते पिछले महीने रामानंद विरक्त वैष्णव मंडल ने महंत सीतारामदास को संत समाज से निष्कासित कर दिया था।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि 8 मार्च 2001 की जिस वसीयत के आधार पर भूमि विक्रय किए जाने का आरोप है, उसी वसीयत को लेकर अतिरिक्त जिला न्यायालय में दलपत सिंह बनाम महंत सीताराम, विक्रम कुमार एवं ट्रस्ट अध्यक्ष नटवरलाल के बीच वाद लंबित है। न्यायालय में दिए अपने बयान में महंत सीतारामदास ने स्वयं स्वीकार किया था कि उनके गुरु महंत जयरामदास ने केवल एक ही अंतिम वसीयत 20 मार्च 2001 को बनाई थी।बताया जा रहा है कि 20 मार्च 2001 की अंतिम वसीयत के अनुसार महंत सीतारामदास को मंदिर की किसी भी अचल संपत्ति को बेचने का अधिकार प्राप्त नहीं है। ऐसे में कथित रूप से दूसरी वसीयत तैयार कर भूमि विक्रय किए जाने के आरोपों को लेकर अब पुलिस ने आपराधिक जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

