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सिरोही-मनरेगा में काम करने वाले असाक्षर महिला-पुरुष श्रमिक अब नरेगा कार्यस्थलों पर रोजाना 30 मिनट की पाठशाला में पढ़ना-लिखना सीखेंगे। कलेक्टर रोहिताश्वसिंह तोमर की पहल पर पंचायती राज एवं साक्षरता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘उजास अभियान’ शुरू किया गया है।
अभियान की थीम ‘म्हारो हस्ताक्षर, म्हारी पहचान’ रखी गई है। दिसंबर तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य जिले के 10,867 असाक्षर महिला-पुरुष नरेगा (वीबी-जी रामजी)श्रमिकों को साक्षर बनाना और उन्हें अपना हस्ताक्षर करना सिखाना है। इसमें 15 से 65 वर्ष आयु वर्ग के श्रमिक शामिल हैं। अभियान के तहत 1 अगस्त से जिले के सभी नरेगा कार्यस्थलों पर कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। नरेगा कार्यस्थलों पर प्रतिदिन 30 मिनट की साक्षरता कक्षाएं लगाई जा रही हैं।
व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए हर 10 असाक्षर श्रमिकों पर एक मेट को ‘मॉनिटर टीचर’ की जिम्मेदारी दी गई है। ये मेट श्रमिकों को पढ़ना-लिखना और हस्ताक्षर करना सिखा रहे हैं। कक्षाओं में हस्ताक्षर के साथ बुनियादी साक्षरता और दैनिक जीवन से जुड़ी सामान्य जानकारी भी दी जा रही है।
अभियान की मॉनिटरिंग जिला साक्षरता अधिकारी रामचन्द्र रावल और सहायक परियोजना अधिकारी दिनेश राजपुरोहित कर रहे हैं। कलेक्टर रोहिताश्वसिंह तोमर ने कहा कि मनरेगा श्रमिकों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से उजास अभियान शुरू किया गया है। प्रत्येक नरेगा स्थल पर मेट द्वारा कक्षाएं ली जा रही हैं, जिनमें श्रमिकों को हस्ताक्षर करने के साथ पढ़ना और लिखना सिखाया जा रहा है। दिसंबर तक अभियान के तहत जिले के 10,867 असाक्षर श्रमिकों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।


