आखातीज इस बार दो दिन मनाई जाएगी: 19 और 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया, रविवार को वधू प्रवेश शुभ नहीं
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सिरोही-वैशाख शुक्ल तृतीया (आखातीज) 19 और 20 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। वैशाख शुक्ल तृतीया रविवार, 19 अप्रैल 2026 को सवेरे 10:50 बजे से शुरू होकर अगले दिन सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को सवेरे 07:28 बजे तक रहेगी।
ज्योतिष एवं वास्तुविद् आचार्य प्रदीप दवे ने बताया- शास्त्रों के नियमानुसार सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, वह पूरे दिन मान्य रहती है। इस कारण 20 अप्रैल को सूर्योदय के समय भी तृतीया तिथि होने से इस दिन भी आखातीज का पर्व मनाया जाएगा।
आखातीज को विवाह के लिए अत्यंत श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। हालांकि, इस बार 19 अप्रैल को रविवार होने के कारण नव-विवाहिता वधू का पहली बार ससुराल प्रवेश नहीं होगा। आचार्य दवे ने सुझाव दिया है कि विवाह के बाद वधू सोमवार को ससुराल में प्रवेश करें, जिससे सभी कार्य सिद्ध होंगे।
अक्षय तृतीया के दिन किए गए सभी मांगलिक कार्य अक्षय फलदायी होते हैं। इनमें शादी-ब्याह, रिश्ता तय करना, गृह प्रवेश, प्रतिष्ठान मुहूर्त, मुंडन संस्कार, वाहन क्रय, सौदा करना, भूमि व मकान क्रय, सोना-चांदी खरीदना, मंत्र-तंत्र-यंत्र साधना और देव प्रतिष्ठा जैसे कार्य शामिल हैं।आखातीज को अबूझ मुहूर्त इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी उच्च राशि में होते हैं। सूर्य मेष राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित होते हैं, जिससे गुरु, सूर्य, चंद्र, जामित्र और अन्य कोई दोष नहीं लगता।
शास्त्रों के अनुसार विवाह के बाद नव-विवाहिता वधू को पहली बार रविवार, मंगलवार और बुधवार को ससुराल में प्रवेश नहीं करना चाहिए।
इस संबंध में शास्त्रों में कहा गया है: “आदित्यवारे प्रभवन्ति रोगा, भौमे च मृत्युर्विधवा बुधे च। गुरुभृगुसोमशनिश्चरेण सिध्यन्ति कार्याणि वधू प्रवेशे॥” इसका अर्थ है कि रविवार को वधू प्रवेश से रोग, मंगलवार को मृत्यु और बुधवार को वैधव्य होता है। जबकि गुरु, शुक्र, सोम और शनि के दिन वधू प्रवेश से सभी कार्य सिद्ध होते हैं।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय तक एक ही वार (दिन) रहता है। मध्यरात्रि को केवल तारीख बदलती है, वार नहीं। अर्थात् विवाह होने के बाद प्रथम रविवार को वधू ससुराल में प्रवेश करें तो रोग उत्पन्न होता है। मंगलवार को मृत्यु, बुध को वैधव्य होता है। गुरु, शुक्र, सोम, शनि के दिन वधु प्रवेश करें तो सब काम सिद्ध होते है।
यह ध्यान रहे एक सूर्योदय से दूसरे दिन सूर्योदय तक वार रहता है अर्थात मध्यरात्रि को वार नहीं बदलता है। मध्य रात्रि को सिर्फ तारीख बदलती है।वर्ष में कुल 6 अबूझ मुहुर्त्त
1-आखातीज
2-धन तेरस
3-विजया दशमी
4-भड्डुली नवमीं
5-देव उठनी एकादशी
6- फूलेरा दूज
आखातीज का महत्व
आखातीज से त्रेता युग का प्रारम्भ हुआ, विष्णु भगवान के षठे अवतार परशुराम भगवान का जन्म हुआ। वेदव्यासजी ने महाभारत लिखना प्रारम्भ किया, मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ, नर-नारायण व हयग्रीव अवतार हुआ, कुबेर धन के देवता नियुक्त हुए।

