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चेक डिशऑनर के दो प्रकरणों में दो बार एक- एक वर्ष की  सजा, जुर्माने के भी आदेश

Pintu Aggarwal by Pintu Aggarwal
May 30, 2026
in Local
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चेक डिशऑनर के दो प्रकरणों में दो बार एक- एक वर्ष की  सजा, जुर्माने के भी आदेश

PALI SIROHI ONLINE

पाली-मात्र पचास हजार रुपए के एक  ऋण  में आदर्श बैंक के ऋणी मोहम्मद शरीफ को चेक डिशऑनर के दो प्रकरणों में दो बार एक- एक वर्ष की  सजा दी गई और एक बार 228482 रूपए  और एक बार 455605 रुपए जुर्माने के रूप में बैंक को अदा करने के भी आदेश दिए।
बैंक की ओर से दोनों मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अरोड़ा और उनके सहयोगी मोहम्मद शरीफ ने पैरवी की।

पाली। आदर्श बैंक (वर्तमान में माउंट नागरिक सहकारी बैंक) के ऋणी मोहम्मद शरीफ को एक ही ऋण मामले में दो बार जारी किए गए दो अलग-अलग चेकों के डिशऑनर होने पर न्यायालय द्वारा अलग अलग दो मुकदमों में दो बार दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई है और एक मामले में तो अपील न्यायालय ने भी दोष सिद्धि के विरुद्ध की गई अपील खारिज कर सजा यथा वत रखी। बैंक की ओर से दोनों मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अरोड़ा ने पैरवी की।
सीनियर एडवोकेट अशोक अरोड़ा ने बताया कि मोहम्मद शरीफ पुत्र अब्दुल हकीम निवासी 120, सुभाष नगर ए, पाली ने आदर्श बैंक वर्तमान नाम माउंट नागरिक सहकारी बैंक से 05.07.2008 को मात्र पचास हजार रुपए की ऋण सुविधा प्राप्त की थी ।

  ऋण राशि बकाया रहने पर एक बार  ऋणी मोहम्मद शरीफ ने 15 मार्च 2013 को 1,22,675 रुपये का चेक बैंक को भुगतान हेतु दिया, जो खाता बंद होने के कारण डिशऑनर हो गया। इस पर बैंक ने सीनियर एडवोकेट अशोक अरोड़ा के माध्यम से धारा 138 एनआई एक्ट के तहत विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट एनआई एक्ट प्रकरण संख्या-1, पाली में मुकदमा दायर किया।

प्रकरण की सुनवाई के बाद न्यायाधीश आशा गुनपाल ने दिनांक 22 मार्च 2023 को मोहम्मद शरीफ को दोषी ठहराते हुए 1,22,675 रुपये तथा उस पर 9 प्रतिशत ब्याज  कुल 228482 रुपए अदा करने के आदेश दिए और एक वर्ष के साधारण कारावास से दंडित किया। उक्त निर्णय के विरुद्ध मोहम्मद शरीफ द्वारा सेशन न्यायालय पाली में अपील प्रस्तुत की गई, जिसे सेशन न्यायाधीश राजेंद्र कुमार जी ने खारिज करते हुए सजा को यथावत रखा।

अधिवक्ता अशोक अरोड़ा ने बताया कि इसी ऋण खाते में बाद में उक्त अपील के विचाराधीन रहते और राशि बकाया होने पर मोहम्मद शरीफ ने पुनः 2,39,795 रुपये का एक अन्य चेक 19.08.2015 को बैंक को दिया, जो फिर से खाता बंद होने के आधार पर डिशऑनर हो गया। इसके बाद बैंक ने पुनः सीनियर एडवोकेट अशोक अरोड़ा के माध्यम से धारा 138 एनआई एक्ट के तहत विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट एनआई एक्ट प्रकरण संख्या-1, पाली में दूसरा मुकदमा दायर किया।

दूसरे प्रकरण में सुनवाई पूर्ण होने के बाद न्यायाधीश शालिनी चौधरी ने इस ऋणी मोहम्मद शरीफ को पुनः  इस चेक डिशऑनर का दोषी पाते हुए 4,55,605 रुपये अदा करने के आदेश दिए तथा एक वर्ष के साधारण कारावास से दंडित किया।

इस प्रकार एक ही ऋण खाते से संबंधित दो अलग-अलग चेक डिशऑनर मामलों में मोहम्मद शरीफ को न्यायालय द्वारा दो बार सजा सुनाई और एक सजा के विरुद्ध की गई अपील भी खारिज हुई।

अब ऋणी के पास उपचार यही है कि वह अपील खारिज के विरुद्ध उच्च न्यायालय में और दूसरे मामले में हुई सजा के विरुद्ध सेशन न्यायालय में अपील करें या बैंक से समझौता करें।

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