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जोधपुर-सांचौर के बहुचर्चित जालमसिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी भागीरथ विश्नोई और उसके साथी रोहित विश्नोई की जमानत याचिका को राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट जस्टिस मुकेश राजपुरोहित ने इस मामले में अपने आदेश में परिवादी के वकील एडवोकेट निखिल भंडारी के तर्कों से सहमति जताते हुए दोनों आरोपियों को राहत प्रदान करने से साफ इनकार किया।
यह था पूरा मामला
गत 18 अगस्त 2024 को सांचौर पुलिस थाने में अनोपसिंह ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उनका छोटा बेटा जालमसिंह, भागीरथ विश्नोई की हुबली स्थित लॉज पर नौकरी करता था। पिछले कुछ समय से भागीरथ वेतन नहीं दे रहा था।
जब जालम सिंह ने बकाया तनख्वाह मांगी तो भागीरथ ने उसे नौकरी से निकाल दिया। आरोप है कि भागीरथ विश्नोई ने अनोपसिंह के घर आकर खुलेआम धमकी दी थी कि जालमसिंह की मुखबिरी से उसकी लॉज से डोडा पोस्त पकड़ाया गया, जिससे उसे 15 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। इस नुकसान की एवज में उसने 15 लाख रुपए मांगे और न देने पर जालमसिंह को जान से मारने की धमकी दी।
17 अगस्त 2024 को जालमसिंह घर से सांचौर जाने के लिए निकला, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटा। जब अनोपसिंह ने बेटे के मोबाइल पर कॉल किया, तब भागीरथ विश्नोई ने खुद फोन रिसीव कर बताया कि वह जालमसिंह को उठा लाया है और 15 लाख रुपए देने पर ही छोड़ेगा, वर्ना उसकी हत्या कर देगा। जालमसिंह ने खुद भी फोन पर बताया कि उसके साथ मारपीट हो रही है। इसी रिपोर्ट के आधार पर सांचौर पुलिस ने भागीरथ विश्नोई सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया और चार्जशीट पेश की।
अदालत में क्या हुआ?
सेशन कोर्ट सांचौर में मुकदमा चल रहा है। इसी बीच, आरोपी भागीरथ विश्नोई और रोहित विश्नोई के वकील ने राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में जमानत अर्जी पेश करते हुए तर्क दिया कि दोनों आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। वकील ने यह भी कहा कि मृतक के शरीर पर आई चोटें साधारण थीं और दोनों काफी समय से जेल में बंद हैं, जबकि मुकदमे के निस्तारण में देर हो सकती है, इसलिए इन्हें जमानत दी जाए।
वहीं, परिवादी अनोपसिंह की ओर से एडवोकेट निखिल भंडारी ने विरोध करते हुए कहा कि भागीरथ विश्नोई ने अपने साथियों के साथ मिलकर जालमसिंह के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की। उसे 40 चोटें लगी और उसे योजनाबद्ध तरीके से अपहरण कर हत्या की गई थी। इतना ही नहीं, उसने घटना से पहले अनोपसिंह के घर आकर खुलेआम धमकी भी दी थी। ये सभी तथ्य चार्जशीट में मौजूद हैं।
हाईकोर्ट का फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, जस्टिस राजपुरोहित ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को मजबूत मानते हुए मुख्य आरोपी भागीरथ विश्नोई और सह-आरोपी रोहित विश्नोई की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता, चार्जशीट में दस्तावेज और सबूतों के मद्देनजर दोनों को रिहा किया जाना उचित नहीं है।


