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मात्र मानव देह से ही हो सकती है धर्माराधना। – जैनाचार्य
रानी में जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वर आदि ठाणा 5 संतों का आगमन
नगराज वैष्णव
रानी /पाली की ओर से विहार करते हुए जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वर जी म.सा. आदि ठाणा 5 संत शुक्रवार 13 जून को रानी नगर पधारे। संतों का बासा भवन रानी में मंगल गीतों के साथ स्वागत किया गया।
बासा भवन में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन देते हुए जैनाचार्य श्री ने कहा कि मानव शरीर की कीमत मात्र जीवंत अवस्था में ही है। मरण होते ही सारा व्यवहार बदल जाता है। जीवंत व्यक्ति को सभी उसके नाम, गोत्र या संबंध से पुकारते हैं, लेकिन मरण होते ही उसे ‘शव’ के नाम से संबोधित किया जाता है। सभी परिवारजन यही पूछते हैं कि बॉडी को कब निकालेंगे।
उन्होंने कहा कि जिस घर को बनाने में व्यक्ति ने जीवन भर खून-पसीना एक किया, उसके मरण के बाद परिवारजन ही उसके पार्थिव देह को श्मशान ले जाते हैं। जिसे वारिसदार बनाते हैं, वही पुत्र उसके पार्थिव देह को अग्निदाह देकर उसके अस्तित्व को मिटा देता है। गाय के गोबर की राख घरेलू कार्यों में उपयोगी होती है, परंतु मानव देह की राख का कोई उपयोग नहीं होता। फिर भी मानव देह की कीमत सबसे अधिक मानी गई है, क्योंकि मात्र मानव देह के माध्यम से ही धर्म की आराधना हो सकती है।
जैन संघ रानी के पदाधिकारियों ने बताया कि 14 जून से प्रतिदिन प्रातः 9:00 बजे प्रेरणादायी प्रवचन होंगे।
एवं 17 जून को गिरनार तीर्थ की संगीतमय भावयात्रा का भव्य आयोजन होगा।

