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नगराज वैष्णव
*गिरनार महातीर्थ की भावयात्रा से श्रद्धालु भावविभोर*
*आचार्य रत्नसेन सूरीश्वर बोले – गिरनार तीर्थ भवसागर पार उतारता है*
*रानी स्टेशन।* श्री सुपार्श्वनाथ शांतिनाथ जैन संघ के बासा भवन में जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वर म.सा. के संयम सुवर्ण वर्ष के उपलक्ष्य में मंगलवार को शाश्वत गिरिराज श्री गिरनार महातीर्थ की भव्य भावयात्रा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम आचार्यश्री के सांसारिक स्वजन मातुश्री शांतिदेवी बस्तीमलजी चौहान परिवार के सौजन्य से हुआ। फलना से पधारे संगीतकार नमन जैन ने भक्ति संगीत से समां बांध दिया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
आचार्यश्री रत्नसेन सूरीश्वर म.सा. ने गिरनार महातीर्थ की महिमा बताते हुए कहा कि जो आत्मा को भवसागर से पार उतारे वही तीर्थ है। गिरनार तीर्थ प्रथम गणधर, श्रुतज्ञान, रत्नत्रयी व तीर्थंकरों के स्पर्श से पावन है। 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के दीक्षा, केवलज्ञान व निर्वाण कल्याणक यहीं हुए। गत चौबीसी के 10 तीर्थंकरों के 26 कल्याणक भी इसी तीर्थ पर संपन्न हुए। आगामी चौबीसी के 24 तीर्थंकर भी यहां अनशन कर मोक्ष प्राप्त करेंगे।
आचार्यश्री ने बताया कि गिरनार पर विराजित भगवान नेमिनाथ की प्रतिमा लगभग 1.65 लाख वर्ष से अधिक प्राचीन है। वर्तमान में उपलब्ध प्रतिमाओं में यह सबसे प्राचीन है। देव-दानव-मानवों द्वारा पूजित यह प्रतिमा पिछले 84,800 वर्षों से गिरनार पर सुशोभित है।
कार्यक्रम के अंत में 19 जून को सुबह 8 बजे 250 सामूहिक समूहों के विशेष धार्मिक आयोजन की जानकारी दी गई।

