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किसानो के लिए वरदान साबित हो रही पीएम कुसुम योजना,
पाली के किसान सौर ऊर्जा से हो रहे आत्मनिर्भर
पाली, 19 अगस्त। जिले के किसान अब सौर ऊर्जा सिंचाई पम्प संयंत्रो को अपनाकर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहे है। प्रधानमंत्री किसान सौर उर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान पीएम कुसुम योजना के घटक-बी के तहत स्थापित किए जा रहे है ये पम्प उन किसानो के लिए एक बड़ी राहत साबित हो रहे है जिनक खेतो में बिजली की उपलब्धता नहीं है या जहाँ विद्युतीकरण का खर्च बहुत अधिक है।
उप निदेशक उद्यान डॉ मनोज अग्रवाल ने बताया कि सौर ऊर्जा सूर्य के प्रकाश से प्राप्त होने वाली एक नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा है जिसे सौर पैनलो के माध्यम से बिजली में परिवर्तित किया जाता है। यह पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ अक्षय ऊर्जा का एक बेहतरीन स्त्रोत भी है। सौर पम्प डीजल और बिजली से चलने वाले पम्पो का एक स्त्रोत भी है। सौर पम्प डीजल और बिजली से चलने वाले पम्पो का एक प्रभावी विकल्प है जो न केवल सिंचाई की लागत को कम करते है बल्कि प्रदूषण को भी नियंत्रित करते हैं। दिन के समय भी सिंचाई की उपलब्धता से किसानो की आय में अप्रत्यक्ष रूप से वृद्धि हो रही है। पाली जिले में अब तक 1857 किसान सफलतापूर्वक नौर ऊर्जा से अपने खेतो की सिंचाई कर रहे है। विगत वर्ष 2024-25 में 528 किसानो ने इस योजना का लाभ उठाया और इस वर्ष जिले को 800 सौर सिचाई पम्प स्थापित करने का लक्ष्य मिला है।
अनुदान प्रावधान और पात्रता –
किसानों को 3,5,7.5 और 10 एचपी क्षमता के सौर ऊर्जा सिंचाई पम्प संयंत्रो पर इकाई लागत का 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। शेष 40 प्रतिशत किसान अपनी हिस्सेदारी के रूप में दे सकते है। जिसमे से 30 प्रतिशत के लिए बैंक ऋण का लाभ उठाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानो को 45 हजार का अतिरिक्त अनुदान भी देय है। जिले के जनजाति उपयोजना क्षेत्र की ग्राम पंचायतो के जनजाति कृषको को तो शत प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। यह योजना सभी प्रकार के सौर पम्पो एसी/डीसी मोटर सरफेस सबमर्सिबल पम्प सामान्य यूनिवर्सल कन्ट्रोलर पर लागू होती है बशर्ते वे किसान की पात्रता और आवश्यकतानुसार हो। योजना के लिए पात्र होने के लिए किसान के पास न्यूनतम 0.4 हैक्टेयर भूमि का स्वामित्व होना चाहिए। अधिसूचित जनजाति क्षेत्र के जनजाति कृषको के लिए न्यूनतम 0.2 हैक्टर सिंचाई के लिए जल स्त्रोत उपलब्ध हो कृषि विद्युत कनेक्शन न हो और सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र का उपयोग कर रहा हो।
आवेदन प्रक्रिया – इच्छुक और पात्र किसान अपने नजदीकी ईमित्र केन्द्र से या स्वयं की एसएसओ आईडी के माध्यम से राजकिसान साथी पोर्टल पर आनलाईन आवेदन कर सकते है। आवेदन के लिए जनाधार से प्रमाणित जमाबन्दी छ माह से अधिक पुरानी नही होनी चाहिए। कृषि विद्युत कनेक्शन विहीन होने का शपथ पत्र और भू-स्वामित्व में जलस्त्रोत होने का निर्धारित शपथ पत्र अपलोड करना होगा। किसान आवेदन के दौरान ही राज्य में वर्ष 2025-26 के लिए अधिकृत सौर ऊर्जा पम्प सयत्र निर्माता आपूर्तिकर्ता फर्मों में से अपनी पसन्द की फर्म का चयन कर सकते है।
उप निदेशक उद्यान अग्रवाल ने बताया कि जिले के अन्य किसानो से भी इस योजना का लाभ उठाने और ऊर्जा मे आत्मनिर्भर होकर सफतापूर्वक खेती करने का आग्रह किया है। लाभार्थी किसानो के अनुभव विभाग की ओर से योजना के तहत लाभार्थी किसान चलसिंह/लादूसिंह निवासी बस्सी ने बताया कि पहले हम डीजल पम्प से सिंचाई करते थे जिससे लागत बहुत अधिक आती थी अब सौर पम्प के उपयोग से लागत कम हुई है। लाटाडा के प्रगतिशील किसान रतनलाल /पकाराम चौधरी कहते है कि सौर पम्प से सिंचाई करने से वे हर मौसम में फसल उत्पादन कर मुनाफा कमा रहे है जबकि पहले साल में हम केवल एक ही फसल ले पाते थे। जाडन के किसान पुखाराम/हेमाराम का कहना है कि सौर पम्प लगने से अधिक क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई होने लगी है जिससे हमने सब्जियो की खेती शुरू की और हमे अधिक आर्थिक लाभ मिल रहा है।
बाबुलाल/जेठाराम निवासी बाली ने बताया कि पहले हमे समय पर बिजली नहीं मिलती थी इसके कारण फसल खराब हो जाती थी, लेकिन सौर पम्प से फसल को समय पर सिंचाई मिलने से पैदावार अच्छी प्राप्त हो रही है।


