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पाली-पाली में दोस्त की 14 साल की नाबालिग बेटी से जबरदस्ती की कोशिश करने वाले आरोपी को कोर्ट ने 4 साल के कठोर कारावास सजा सुनाई है। 20 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया है।
आरोपी नाबालिग के घर में उस समय घुसा था, जब वह अकेली थी। उसने छेड़छाड़ के बाद जबरदस्ती करने की कोशिश की, लेकिन नाबालिग के शोर मचाने पर आरोपी डरकर भाग गया। मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तारकिया था, बाद में उसे जमानत मिल गई।
गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की बहस के आधार पर 11 अगस्त को पोक्सो कोर्ट संख्या-1 के जज निहालचंद ने उसे दोषी मानते हुए सजा सुनाई। घटना 10 मार्च 2026 को पाली में हुई थी।
अकेली थी नाबालिग, घर में घुसकर की छेड़छाड़
कोर्ट की विशिष्ट लोक अभियोजक उपमा रावल ने बताया पीड़िता के भाई ने 11 मार्च 2026 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया कि 10 मार्च 2026 को उसकी 14 साल की नाबालिग बहन घर में अकेली थी। इसी दौरान उसका परिचित युवक जबरदस्ती घर में घुस गया और उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा। आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती करने की भी कोशिश की।
चिल्लाने पर डरकर भाग गया आरोपी
नाबालिग ने हिम्मत दिखाते हुए जोर से शोर मचाया। इससे आरोपी डर गया और घर से भाग गया। पीड़िता के भाई के अनुसार, अगर वह शोर नहीं मचाती तो आरोपी उसके साथ गलत काम कर सकता था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया। बाद में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया।
गवाहों के बयान और बहस के आधार पर सुनाया फैसलामामले की सुनवाई पाली के पोक्सो कोर्ट संख्या-1 में हुई। 11 अगस्त 2026 को जज निहालचंद ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी को नाबालिग से छेड़छाड़ का दोषी माना। कोर्ट ने उसे 4 साल के कठोर कारावास के साथ 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। परिवादी पक्ष की ओर से एडवोकेट मनीष राजपुरोहित ने पैरवी की।

