PALI SIROHI ONLINE
पाली-स्कूल की छुट्टी होने के कारण 8 साल का राहुल और उसकी 10 साल की बहन रीना बकरियां चराने जंगल गए थे। दोनों भाई-बहन भीखा नाडा के पास थे। इसी दौरान नाडी के किनारे खड़े राहुल का अचानक पैर फिसल गया और वह पानी में गिर गया।
राहुल को पानी में डूबता देख उसकी बहन रीना उसे बचाने के लिए तुरंत नाडी में कूद गई। उसने भाई को बचाने की कोशिश की, लेकिन पानी गहरा होने के कारण दोनों संभल नहीं पाएऔर डूबने से दोनों की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। काफी प्रयास के बाद दोनों बच्चों के शव नाडी से बाहर निकाले गए, जिसके बाद पुलिस ने शव रास हॉस्पिटल की मॉर्च्यूरी में रखवाए।
यह घटना ब्यावर जिले के रास थाना क्षेत्र में बुधवार को हुआ।बकरियां चराने जंगल की तरफ गए थे भाई-बहन
रास थानाप्रभारी पन्नालाल सैनी ने बताया कि रूपनगर निवासी प्रकाश बावरी के 10 साल की बेटी रीना और 8 साल का बेटा राहुल बुधवार को भीखा नाडा की तरफ बकरियां चराने गए थे। स्कूल की छुट्टी होने के चलते दोनों भाई-बहन बकरियां चराने जंगल में गए थे। इस दौरान भीखा नाडा के पास राहुल खड़ा था। राहुल का पैर अचानक फिसल गया। इसके बाद वह नाडी में गिर गया। राहुल को नाडी में डूबता देखकर उसकी 10 साल की बहन रीना उसे बचाने के लिए नाडी में कूद गई। रीना ने राहुल को बचाने का प्रयास किया, लेकिन लाख प्रयास के बाद भी वह उसे नहीं बचा सकी। इसके बाद राहुल और रीना दोनों नाडी में डूब गए।जानकारी मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे
हादसे की जानकारी कुछ देर बाद ग्रामीणों को मिली। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे। सूचना मिलने पर एएसआई धर्माराम जाट पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस और ग्रामीणों ने दोनों बच्चों को नाडी से बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू शुरू किया।दोनों बच्चों के शव नाडी से बाहर निकाले
ग्रामीणों की मदद से दोनों बच्चों के शव नाडी से बाहर निकाले गए। दोनों बच्चों की बॉडी नाडी से बाहर निकलने के बाद हादसे की जानकारी परिजन को हुई। बच्चों की बॉडी देखकर परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। पुलिस ने दोनों बच्चों के शव रास हॉस्पिटल की मॉर्च्यूरी में रखवाए हैं। पुलिस ने मामले की जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
मृतक दादी के पास रहते थे
मृतक दोनों बच्चें पांचवी कक्षा में पढ़ते थे और अपनी दादी रमलीदेवी के पास रहते है। पिता गंगानगर में मजदूरी करते है। हादसे की खबर मिलने पर वे भी गांव पहुंचे। बच्चों का गुरुवार सुबह गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। सरदारराम ने बताया कि चारों पोते-पोती अपनी दादी के पास ही रहते थे। विष्णु और बलदेव दो पोते ही अब बचे है।


