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रेवदर-रेवदर के गोलोक महातीर्थ नंदगांव में बुधवार को धानोल और पालडी से निकली सुरधेनु धर्म ओढ़नी यात्रा गोऋषि स्वामी दत्तशरणानंद जी महाराज के सानिध्य में पहुंची, जहां श्रद्धा, सेवा और संस्कार का अद्भुत समागम देखने को मिला।
नंदगांव पहुंचने पर अभिनव ब्रजमंडल की ओर से यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर गोभक्तों ने गौमाता का पूजन कर उन्हें चुनरी ओढ़ाई और श्रद्धापूर्वक गोग्रास व श्रीअन्न अर्पित किए।
वरिष्ठ न्यासी केवलाराम पुरोहित ने बताया कि यात्रा के धानोल (रानीवाड़ा) पड़ाव पर भक्ति और गोसेवा का अद्वितीय दृश्य सामने आया, जहां ग्रामीणों ने 51 बोरी श्री अन्न और 2,51,000 रुपए श्रीनिधि गोसेवा में समर्पित की। इस अवसर पर नरेंद्र राजपुरोहित, सामाराम बा, ताराचंद जोशी, मूलाराम चौधरी, नटवरराम कोली, छोगाराम देवासी, ताऊराम पाउआ सहित सैकड़ों गोभक्तों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
पालड़ी के ग्रामीणों ने भी यात्रा में ऐतिहासिक भूमिका निभाते हुए 201 बोरी श्रीअन्न और 5,51,000 रुपए श्रीनिधि समर्पित की। इस अवसर पर संत बलदेवदास महाराज की सान्निध्यता में केवलाराम पुरोहित, प्रवीण पुरोहित, केशाराम, पीराराम, अमराराम, कनुराम, बिजलाराम, सावलाराम चौधरी, कालाराम, चेनाराम, सदाराम, जवाहराराम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
युवाओं को जोड़ने का लिया संकल्प
साधक धर्मशरण ने कहा कि यात्रा से जुड़े प्रत्येक गोभक्त अब अपने क्षेत्र में युवाओं को गोसेवा से जोड़ने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि अभिनव ब्रजमंडल द्वारा विकसित अर्बुदारण्य धारा क्षेत्र में प्रवेश करते ही द्वापर युग की अनुभूति होती है, जहां गौ, ग्राम और गंगा की पवित्र त्रिधारा प्रवाहित होती है।
धर्म, पर्यावरण और सेवा का संदेश
सुरधेनु धर्म ओढ़नी यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण चेतना, गौसंवर्धन और सनातन संस्कारों के प्रचार का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है। गोऋषि स्वामी दत्तशरणानंद जी महाराज के मार्गदर्शन में यह यात्रा गांव-गांव सेवा, श्रद्धा और आत्मचेतना का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है।


