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माउंट आबू-माउंट आबू की नक्की झील पर सोमवार को पीपल पूनम के मौके पर आदिवासी गरासिया समुदाय का विशेष मेला लगा। समुदाय के लोगों ने कानूडा घाट और जेटी पर पितृ तर्पण किया।
गरासिया समुदाय के पुरुष सफेद धोती पहनकर पूजा सामग्री के साथ पहुंचे। उनके पास नारियल, लाल पिराई, वाटकी, अगरबत्ती, नुगदी (प्रसादी) और सिंदूर था। साथ ही एक छोटी हांडी में चांदी में मढ़े हुए नाखून थे। इस हांडी में पिंक रंग का कपड़ा रखा जाता है। इसमें दिवंगत परिजनों के दाएं और बाएं हाथ के अंगूठे के नाखून होते हैं। ये नाखून चांदी में मढ़े होते हैं। इन्हें दिवंगत परिजनों की निशानी माना जाता है।
नक्की झील के चारों ओर वाद्य यंत्रों की धुन गूंजती रही। समुदाय के लोगों ने अपनी परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ विभिन्न रस्में की। तर्पण के बाद कुछ लोग नगदी, कुछ पताशे और घर का बना प्रसाद बांटते हैं। स्नान और पूजा के बाद सभी लोग ढोल-थाली के साथ नृत्य करते हैं। उनकी मान्यता है कि पितृ तर्पण के बाद रोना अशुभ होता है। आदिवासी समुदाय के लिए माउंट आबू का यह स्थान हरिद्वार के समान पवित्र है।


