मोदरान में व्यक्तित्व विकास एवं संस्कार शिविर का भव्य शुभारंभ
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मोदरान में व्यक्तित्व विकास एवं संस्कार शिविर का भव्य शुभारंभ
बच्चों में दिखा अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उत्साह
मोदरान | जगमाल सिंह राजपुरोहित
मोदरान स्थित श्री अणदेश्वर वाटिका, सोनी समाज भवन भीमपुरा रोड पर आयोजित चार दिवसीय “व्यक्तित्व विकास एवं संस्कार शिविर” का रविवार को महामण्डलेश्वर श्री श्री 1008 श्री रविशरणानंद गिरीजी महाराज के सानिध्य में भव्य शुभारंभ हुआ। शिविर में क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक एवं समाजसेवी पहुंचे। पूरे आयोजन स्थल पर सुबह से ही उत्साह, अनुशासन एवं सेवा भावना का वातावरण देखने को मिला।
शिविर के प्रथम दिन से ही विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति के प्रति विशेष उत्साह दिखाई दिया। आयोजन स्थल पर सुबह से विद्यार्थियों का आगमन शुरू हो गया था। पंजीयन काउंटर पर युवाओं एवं कार्यकर्ताओं ने सुव्यवस्थित व्यवस्था संभाली। कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ शिविर में भाग लेकर अपनी प्रतिभा, जागरूकता एवं अनुशासन का परिचय दिया।
प्रथम दिवस कुल 208 विद्यार्थियों का पंजीयन हुआ। पंजीयन के पश्चात प्रथम सत्र में परिचय एवं शिविर संबंधी आवश्यक निर्देश प्रदान किए गए।
विशाल सभागार में सैकड़ों विद्यार्थियों ने एक साथ बैठकर प्रार्थना सभा में भाग लिया तथा भोजन मंत्र उच्चारण के साथ पंक्तिबद्ध एवं अनुशासित तरीके से सामूहिक भोजन ग्रहण किया। पूरे वातावरण में भारतीय संस्कृति, सेवा भावना, अनुशासन एवं आध्यात्मिक ऊर्जा की झलक स्पष्ट दिखाई दी। आयोजन समिति द्वारा विद्यार्थियों के रहने, भोजन, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।
शिविर प्रबंधक रमेश सोनी पुनासा ने बताया कि आज का आधुनिक दौर बच्चों को तकनीक और भौतिकवाद की ओर तेजी से ले जा रहा है। ऐसे समय में बच्चों को संस्कार, संस्कृति, अनुशासन एवं नैतिक शिक्षा से जोड़ना समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शिविर बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें सही दिशा प्रदान करते हैं।
श्री सोनी पुनासा ने बताया कि शिविर का उद्देश्य केवल बच्चों को शिक्षा देना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन जीने की कला, समय का महत्व, माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान, राष्ट्रप्रेम, सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारियों का बोध कराना भी है।
द्वितीय दिवस सोमवार सुबह 5 बजे जागरण के साथ दिनचर्या की शुरुआत हुई। योग, प्राणायाम, साधना और भारतीय संस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिली।
प्रातः जागरण के साथ विद्यार्थियों ने योगाभ्यास, ध्यान, प्रार्थना एवं वातावरण शुद्धि यज्ञ में भाग लिया। लगभग 250 शिविरार्थी, शिक्षक एवं प्रबंधक टोली अनुशासित पंक्तियों में बैठकर योग एवं साधना करते नजर आए।
सुबह की ठंडी हवाओं और शांत वातावरण के बीच बच्चों ने विभिन्न योगासन एवं ध्यान प्रक्रियाओं का अभ्यास किया। संतों एवं प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को शरीर और मन को स्वस्थ रखने के महत्व के बारे में जानकारी दी। पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा, अनुशासन एवं आध्यात्मिक वातावरण का अद्भुत संगम देखने को मिला।
उद्घाटन सत्र में शिविर गीत, सुभाषित एवं प्रेरणादायक उद्बोधन प्रस्तुत किए गए। महामण्डलेश्वर श्री रविशरणानंद गिरीजी महाराज ने कहा कि केवल पुस्तक ज्ञान ही जीवन में सफलता नहीं देता, बल्कि अच्छे संस्कार और नैतिक मूल्य ही मनुष्य को महान बनाते हैं। उन्होंने बच्चों को माता-पिता का सम्मान करने, समय का सदुपयोग करने एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।
वहीं “आदर्श दिनचर्या एवं आदर्श बालक के गुण” विषय पर आयोजित सत्र में गणपतसिंह राजपुरोहित ने विद्यार्थियों को अनुशासन, समय प्रबंधन, नियमित अध्ययन एवं सकारात्मक सोच का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी बचपन से अनुशासन और संस्कार अपनाते हैं, वही भविष्य में समाज और राष्ट्र का गौरव बनते हैं।
दोपहर में आयोजित मौखिक अभिव्यक्ति सत्र में विद्यार्थियों ने कहानी, गीत, कविता एवं भाषण प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित अभिभावकों एवं समाजजनों का मन मोह लिया।
शाम के सत्र में “सांस्कृतिक भारत का परिचय” विषय पर व्याख्यान आयोजित हुआ, जिसमें भारतीय संस्कृति, परंपराओं, ऋषि-मुनियों की शिक्षाओं एवं सनातन संस्कारों की महानता पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन एवं श्रेष्ठ संस्कृति है, जो पूरी दुनिया को शांति, सेवा और मानवता का संदेश देती है।
शारीरिक विकास और आत्मरक्षा पर भी विशेष जोर
शिविर में केवल नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि बच्चों के शारीरिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शारीरिक सत्र में व्यायाम, खेल, नियुद्ध एवं आत्मरक्षा से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को स्वस्थ शरीर एवं स्वस्थ मन के महत्व के बारे में बताया।
रात्रिकालीन सत्र में भजन, कीर्तन, हास्य एवं विनोद कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय एवं आनंदमय बना दिया। विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से भजन प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शिविर की विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी युवाओं को सौंपी गई है, जिससे उनमें नेतृत्व क्षमता, सेवा भावना एवं संगठन कौशल का विकास हो सके। युवा कार्यकर्ता भोजन व्यवस्था, अनुशासन, पंजीयन एवं आवास व्यवस्था में पूरी निष्ठा से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शिविर में सर्व समाज का सहयोग देखने को मिल रहा है। विभिन्न समाजों के लोगों द्वारा तन, मन और धन से सहयोग कर आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। शिविर संचालन एवं व्यवस्थाओं में प्रबंधक रमेश सोनी, बौद्धिक शिक्षण प्रमुख नरेन्द्र आचार्य, कार्यालय प्रमुख मानाराम चौधरी, शारीरिक शिक्षण प्रमुख विक्रम चौधरी, पर्यवेक्षक अर्जुन कुमार सहित जानुराम चौधरी, जबराराम चौधरी, प्रकाशकुमार चौधरी, गणेशाराम बीजाराम, मोहनलाल, विक्रमकुमार, जोगाराम, अशोककुमार सोनी, दोलचन्द विक्रम, दिनेश, प्रकाश एवं प्रधुम्न पुनासा सेवाएं दे रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में इस प्रकार के संस्कार शिविर को लेकर अभिभावकों एवं समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। अभिभावकों ने कहा कि आज के समय में मोबाइल और सोशल मीडिया के प्रभाव के बीच बच्चों को संस्कारों एवं संस्कृति से जोड़ने के लिए ऐसे शिविर अत्यंत आवश्यक हैं।
अभिभावकों ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि यह शिविर आने वाली पीढ़ी को सही दिशा देने का कार्य कर रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस शिविर में विद्यार्थियों को व्यक्तित्व विकास, योग, नैतिक शिक्षा, संस्कार, आध्यात्मिक चिंतन, राष्ट्रभक्ति एवं सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
द्वितीय दिवस कोलचन्द सोनी, भोमाराम, कन्हैयालाल खण्डेलवाल, जोगाराम चौधरी सहित दर्जनों समाजसेवी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
