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खीमाराम मेवाडा
पाली-रोहट के 71 गांवों के लिए भी अलग प्लान : जैतपुर क्षेत्र के 35 गांवों के लिए बांकली बांध के डाउनस्ट्रीम में तीन खुले कुएं बनाने की योजना है। यहां से रोज 2.5 एमएलडी पानी लिया जाएगा। रोहट और कानावास क्षेत्र के 36 गांवों के लिए जोधपुर और सरदार समंद के पानी का विकल्प रखा गया है। इससे इन गांवों की जवाई पर निर्भरता सीमित की जाएगी। मार्च से पाली शहर के लिए रोज 25 एमएलडी पानी की व्यवस्था करनी होगी।
कुड़ी हौद से मौजूदा पाइपलाइन के जरिए 12 एमएलडीयानी 1.20 करोड़ लीटर पानी रोज रोहट लाया जा सकता है। इसमें 2 एमएलडी रोहट के लिए रहेगा। बाकी 10 एमएलडी यानी एक करोड़ लीटर पानी पाली भेजा जाएगा। सरदार समंद से 10 एमएलडी और जाडन माइंस-बाणियावास से 5 एमएलडी लेने की योजना है। 25 एमएलडी का आंकड़ा पूरा होगा। दूसरा विकल्प : वाटर ट्रेन चलाना : जोधपुर से रेल के जरिए रोज 10 एमएलडी पानी पाली लाने का प्रस्ताव है। यानी हर दिन एक करोड़ लीटर पानी रेल से लाना पड़ सकता है। सरदार समंद से 10 एमएलडी और जाडन माइंस-बाणियावास से 5 एमएलडी लिया जाएगा।
इस विकल्प में भी पाली के लिए कुल 25 एमएलडी पानी जुटाने का लक्ष्य है। हालांकि वाटर ट्रेन अंतिम फैसला नहीं है।
तीसरा विकल्प : डीएमआईसी से: डीएमआईसी स्रोत से 13 एमएलडी पानी रोहट लाने की योजना है। इसमें 3 एमएलडी रोहट को मिलेगा। शेष 10 एमएलडी पाली भेजा जाएगा। सरदार समंद से 10 एमएलडी और जाडन-बाणियावास से 5 एमएलडी जोड़कर पाली की जरूरत पूरी करेंगे। हर विकल्प में 15 एमएलडी सरदार समंद और जाडन-बाणियावास से आएगा। असली चुनौती बाकी 10 एमएलडी की है। किरण राजपुरोहित | पाली पीएचईडी की इमरजेंसी कार्ययोजना के मुताबिक जवाई बांध का लाइव स्टोरेज 6 मार्च 2027 तक ही पानी दे पाएगा। इससे पहले 13 फरवरी से डेड स्टोरेज की पंपिंग शुरू करनी पड़ेगी। पाली शहर के अलावा बाकी क्षेत्रों में 1 नवंबर से दूसरे स्रोतों से जलापूर्ति करनी पडेगी। अधीक्षण अभियंता मनीष माथर के अनसार मार्च मेंपड़ेगी। अधीक्षण अभियंता मनीष माथुर के अनुसार मार्च में पाली शहर के लिए रोज 25 एमएलडी पानी जुटाने के तीन विकल्प हैं। इनमें कुड़ी हौद से पाइपलाइन के जरिए पानी लाना शामिल है। यह व्यवस्था नहीं बनती है तो जोधपुर से रेल के जरिए रोज एक करोड़ लीटर पानी पाली लाने का विकल्प भी रखा गया है। गत 28 सितंबर को जवाई का गेज 24 फीट था। बांध में 1476 एमसीएफटी पानी था। इसमें 495 एमसीएफटी डेड स्टोरेज है। यानी उपयोग योग्य लाइव स्टोरेज 981 एमसीएफटी ही है। इसी पानी को मार्च तक खींचना अब सबसे बड़ी चुनौती है। बता दें कि पीएचईडी ने शहरी क्षेत्र के लिए 39.90 करोड़ रुपए और ग्रामीण क्षेत्र के लिए 85.53 करोड़ रुपए की आपात योजना बनाई है। दोनों मिलाकर आंकड़ा करीब 125.42 करोड़ रुपए पहुंचता है।
इसमें 233 नए नलकूप प्रस्तावित हैं। 129 स्रोत विकास कार्य होंगे। नई पाइपलाइन बिछेगी। पंप-मशीनरी, इलेक्ट्रिक पैनल, केबल और वाल्व बदले जाएंगे। इसके बावजूद जहां पानी नहीं पहुंचेगा, वहां परिवहन ही सहारा होगा। ग्रामीण क्षेत्र में 182 गांव और 185 ढाणियों के लिए परिवहन का प्रावधान है। 1. कटौती से रोज 3 एमसीएफटी पानी बचाया : पीएचईडी ने 17 सितंबर से शहरी क्षेत्रों में अब 72 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 96 घंटे के अंतराल कर दिया। इससे जवाई की रोजाना खपत 10 एमसीएफटी से घटकर 7 एमसीएफटी रह गई है। दूसरा चरण 1 नवंबर से शुरू होगा। दूसरे बांध, माइंस, खुले कुएं और नलकूपों से पानी लिया जाएगा। लक्ष्य जवाई की खपत को 6 एमसीएफटी प्रतिदिन तक सीमित करना है।2. 13 फरवरी से डेड स्टोरेज में उतरना पड़ेगा : जवाई का गेज 5 फीट और स्टोरेज करीब 615 एमसीएफटी पर पहुंचते ही 13 फरवरी 2027 के बाद डेड स्टोरेज से पानी पंप करना होगा। यह व्यवस्था मार्च के आखिर तक चलानी पड़ सकती है।
यानी फरवरी के दूसरे पखवाड़े से पाली की जलापूर्ति वैकल्पिक स्रोत पर भी निर्भर करेगी। 3. जवाई पर जिले के 10 शहर और अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र निर्भर हैं: इसलिए 1 नवंबर से सोजत को रायपुर, गजनई और कन्तालिया बांध से पानी दिया जाएगा। जैतारण-निमाज में रायपुर बांध और स्थानीय स्रोत काम आएंगे। मारवाड़ जंक्शन को सिरियारी बांध से जोड़ा जाएगा। रानी, बाली, फालना और तखतगढ़ में खुले कुएं और नलकूपों पर जोर रहेगा।





