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जालोर-जवाई नदी के पुनर्जीवन और प्रदूषण के स्रोतों की मैपिंग के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में गठित हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी ने मंगलवार को जवाई नदी के किनारे आधा दर्जन से अधिक पॉइंट का निरीक्षण किया। पहले दिन कमेटी ने जिले में जवाई नदी के करीब 33 किलोमीटर क्षेत्र का सर्वे किया। बुधवार को केशवना और सायला क्षेत्र में नदी का निरीक्षण किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान नदी में जगह-जगह बजरी खनन औरउससे बने गहरे गड्ढे मिलने पर कमेटी ने खनन विभाग के अधिकारियों से सवाल किए। पचानवा और अगवरी में अवैध बजरी खनन से बने गहरे गड्ढे सामने आए। कई जगह इतनी बजरी निकाली गई थी कि नदी की निचली सतह साफ दिखाई दे रही थी। स्थिति को देखते हुए सेवानिवृत्त न्यायाधीश संगीत लोढ़ा ने खनिज अभियंता नरेंद्र खटीक को फटकार लगाई और अवैध खनन तत्काल रुकवाकर कार्रवाई के निर्देश दिए।
सात पॉइंट का निरीक्षण किया
कमेटी ने पावटा, डोड़ियाली, पचानवा, अगवरी, दयालपुरा, छिपरवाड़ा और सांकरणा पॉइंट का निरीक्षण किया।डोड़ियाली और पावटा में जवाई नदी पर रपट निर्माण का काम चल रहा है। यहां टीम को पूर्व में हुए बजरी खनन से बने गड्ढे दिखाए गए। पचानवा और अगवरी में खनन से बने गहरे गड्डों की स्थिति को देखते हुए टीम ने मौके की वीडियोग्राफी करवाई।
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने उन स्थानों का भी निरीक्षण करवाने की मांग की, जहां अवैध खनन और नदी के स्वरूप में बदलाव की शिकायतें सामने आई थीं। कमेटी ने कई स्थानों पर मौके की स्थिति दर्ज करने के साथ फोटो और वीडियोग्राफी करवाई।
ग्रामीण ने कहा- एक रवन्ना, पूरे दिन बजरी का परिवहन
पचानवा गांव के ग्रामीण इन्द्रसिंह राजपूत ने कमेटी के सामने बजरी खनन और परिवहन को लेकर शिकायत रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक रवन्ना लाकर पूरे दिन अवैध रूप से बजरी का परिवहन किया जा रहा है। कमेटी ने शिकायत को गंभीरता से लिया।
अगवरी में हुए बजरी खनन की भी वीडियोग्राफी करवाई गई। दयालपुरा के पास जवाई नदी में बजरी की लीज है। यहां लीजधारक की ओर से किए गए खनन से बने गड्डों की भी टीम ने वीडियोग्राफी की। ग्रामीणों ने मादड़ी पॉइंट का निरीक्षण करने की मांग की, लेकिन टीम वहां नहीं पहुंची। इसको लेकर भी खनिज अभियंता से सवाल किए गए।
मादड़ी में 20 फीट तक खनन का दावा
ग्रामीणों के अनुसार, जवाई नदी के मादड़ी पॉइंट पर करीब 20 फीट तक बजरी खनन किया गया है। उनका कहना है कि नदी में बजरी की मोटी परत पानी को प्राकृतिक रूप से फिल्टर करने का काम करती है। बजरी हटने से प्राकृतिक फिल्टर प्रभावित हो सकता है और इसका असर भूजल पर भी पड़ने की आशंका है।
ग्रामीणों के अनुसार, दयालपुरा और गंगावा गांवों के लिए जवाई नदी पानी का प्रमुख स्रोत है। अब खनन का क्षेत्र दयालपुरा की ओर बढ़ रहा है। बजरी की परत हटने के बाद नीचे चिकनी मिट्टी की परत सामने आने से पानी के जमीन मेंरिसाव पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण नदी किनारे बसे ग्रामीण बजरी खनन की अनुमति को लेकर चिंतित हैं।
सांकरणा में लीज क्षेत्र की भी जांच
शाम को कमेटी ने सांकरणा जवाई नदी क्षेत्र में बजरी माइंस का निरीक्षण किया। सांकरणा ब्रिज से महेशपुरा रोड तक करीब पांच किलोमीटर क्षेत्र में वैध और अवैध दोनों तरह के खनन की स्थिति बताई गई। टीम ने लीज क्षेत्र के बाहर खनन की स्थिति भी देखी और मौके की फोटो व वीडियोग्राफी करवाई।
कमेटी ने खनन के बाद नदी की स्थिति का भी निरीक्षण किया। मौके की स्थिति को देखते हुए संगीत लोढ़ा ने खनिज अभियंता को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
अधिकारियों की टीम रही मौजूद
निरीक्षण के दौरान आरएएस मनोज कुमार, आहोर एसडीएम रोहित चौहान, तहसीलदार लधाराम पंवार, आहोर थानाधिकारी करणसिंह, उम्मेदपुर आरआई राजाराम चौधरी, गुड़ाबालोतान आरआई नरेंद्रसिंह बालोत सहित खनिज, पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन, पीएचईडी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।





