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जालोर-मांडोली के बहुचर्चित गणपत सिंह हत्याकांड में आरोपी लच्छू देवी को मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि मामले में आरोपी महिला से कोई बरामदगी नहीं हुई है और कॉल डिटेल रिकॉर्ड में भी उसकी सह-आरोपियों से बातचीत सामने नहीं आई। शिकायतकर्ता और मृतक के बेटे के बयानों में भी महिला के खिलाफ कोई आरोप नहीं है। ऐसे में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी पूरी नहीं दिखाई देती।
हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप शाह ने 11 अगस्त को लच्छू देवी की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे 50 हजार रुपए के व्यक्तिगत मुचलके और 25-25 हजार रुपए की 2 जमानतों पर रिहा करने का आदेश दिया है। लच्छू देवी फिलहाल भीनमाल जेल में बंद थी। मामले में बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि 27 अगस्त 2024 को मृतक अपने बेटे खुशवीर सिंह उर्फ विक्रम के साथ दुकान पर बैठा था। इसके बाद मृतक शौच का कहकर गया, लेकिन वापस नहीं लौटा।
एफआईआर में किसी व्यक्ति को नामजद नहीं किया था और शिकायतकर्ता के बयान में भी किसी आरोपी के खिलाफ
आरोप नहीं था।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि घटना के करीब 6 महीने बाद 19 मार्च 2025 को मृतक के बेटे खुशवीर सिंह का बयान दर्ज किया। उसमें भी किसी व्यक्ति पर पिता की हत्या को लेकर संदेह जताने की बात नहीं थी। इसके बाद 8 मार्च 2026 को दोबारा बयान दर्ज हुआ, जिसमें लच्छू देवी का नाम आया। इसमें केवल इतना बताया कि वह प्याज का भुगतान करने आई थी। बचाव पक्ष ने इसे हत्या से जोड़ने वाली कड़ी नहीं माना। साथ ही बचाव पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया कि सह-आरोपी गजेंद्र सिंह और वागाराम के कथित स्वैच्छिक बयानों में भी लच्छू देवी की अपराध में भूमिका का उल्लेख नहीं है।
दोनों ने मृतक की हत्या करने की बात कही थी। साथ ही, लच्छू देवी से कोई बरामदगी भी नहीं हुई।
ट्रायल आज से, जमानत का असर इस पर नहीं पड़ेगा गणपतसिंह हत्याकांड मामले में भीनमाल एडीजे कोर्ट में ट्रायल बुधवार से शुरू होगा। बुधवार को तीनों आरोपियों को आरोप सुनाए जाएंगे। हाईकोर्ट से लच्छू देवी को मिली जमानत का असर ट्रायल पर नहीं पड़ेगा। हाईकोर्ट के जमानत आदेश में स्पष्ट है कि जमानत देते समय की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं। इन टिप्पणियों से मुकदमे की सुनवाई या उसके अंतिम निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
हाईकोर्ट का आदेश है कि लच्छू देवी को ट्रायल कोर्ट में हरसुनवाई पर उपस्थित रहना होगा। कोर्ट द्वारा बुलाए जाने पर भी पेश होना होगा।


