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आदिवासी दिवस पर योध्दा जाला मीणा का स्मारक बनाने कि मांग
जालोर जिले में विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया। जिला स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ रैली निकाल कर किया गया। जिसमें महिलाएं समेत समाज के लोग डीजे की धून पर नाचते गाते हुए मीणा समाज छात्रावास धवला रोड से भीनमाल रोड, देव नारायण सर्कल, सूरज पोल, अस्पताल चौराहा, भीमराव अम्बेडकर स्थल पर डॉ भीमराव अम्बेडकर को पुष्प अर्पित कर रवाना हुए जो वन वे रोड से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे जहां सभी ने शांतिपूर्वक आदिवासी समाज ने जिला कलेक्टर कार्यालय के नाम एसडी को ज्ञापन सौपा ज्ञापन में बताया प्राचीनकाल में श्री जालंदर नाथजी जालोर पधारे उस समय शहर नहीं था और न ही राजा। कनकगिरि के पास कलशाचल फिर उन्हें तपस्या के लिए उत्तम स्थान लगा जहाँ उन्होंने अनेक वर्ष तपस्या में व्यतीत किये – फिर वहाँ एक दिन ‘रंक को राव बनाने वाले’ श्री जलंधरनाथ जी को जाला मीणा मिला। इस पर श्री जालंदर नाथजी ने उसे आर्शीवाद प्रदान कर जालोर बसाने की आज्ञा दी कनकगिरि व कनकाचन पहाडी के बिच में जाला मीणा ने नाथ संप्रदाय के गुरू श्री जालंदर नाथ के आर्शीवाद से जाला मीणा ने वि.स. 900 कि जेष्ठ शुल्क 3 मंगलवार के दिन जाबालिपुर कबिला बचाया था। इस कबिले के मीणा अपनी बहादुरी के लिए प्रसिद्ध थे। जाबलीपुर कबिले के मीणा स्वतंत्र शासन करते थे। कबिले का मुख्या जाला मीणा बहादुर व लडाकू योध्दा था। वि. सं. 1186 की साल में मीणा सरदारो के हाथ से जाबालिपुर (आधुनिक जालोर) राज्य जाता रहा।
● पुराने खण्डहरो व मंदिर व शिलालेख के अवशेष:-
जालोर कि कनकगिरि व कनकाचन पहाडी के बिच में आज भी पुराने खण्डहरो के अवशेष करीब दो किलोमीटर के क्षेत्र में आज भी देखने को मिलते हैं। आदिवासी मीणा समाज सांस्कृतिक प्रगति का उदाहरण माना जा सकता हैं। इतिहासकारो ने इतिहास में इसे जाला मीणा नगर का उल्लेख किया हैं।
● लोकश्रुतियो के अनुसार जालोर के कनकगिरि व कनकाचन पहाडी के बिच में मीणा समुदाय के लोग निवास करते थे। जाला मीणा ने जालोर नगर सहित अधिकांश मंदिर भी स्थापित किए थे। बहारी आक्रमण कारियों ने जाला मीणा नगर पर बार बार आक्रमण उन्हें अपने अधिन करना चाहते थे। लेकिन आक्रमण से अधिन नहीं होने पर समझौते के तहत जाला मीणा का राज मिटाने के लिए एक धड़ होकर मीणा योद्धा को गोट में बुलाकर अधिकांश मीणा योद्धा को मार दिया। जिससे आह्वान होकर अधिकांश मीणा समुदाय जालोर छोडकर अरावली कि पहड़ियों में जाकर भेष बदलकर भक्ति भाव में लीन हो गए। जाला मीणा श्री जालंदर नाथ का शिष्य था। उनके साथियो ने हत्या और अन्याय को छोड़कर भगवान शिव कि भक्ति भावो में लीन हो गए। कुछ योध्दा ने जालोर के आस पास नगर बचाकर बस गए।