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हरजी-कस्बे में सोमवार को मीणा समाज की महिलाओं ने समंदर हिलोरने की रस्म निभाई। समाज की महिलाएं सुबह से ही अपनी पारम्परिक वेशभूषा (चूड़ा चुन्दरी व कटारी घाघरा) पहना।
वहीं सिर पर सुसज्जित मटका धारण कर डीजे की धुन के साथ कस्बे के मुख्य बाजार से शोभायात्रा निकालते हुए तालाब पर पहुंची। इस दौरान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण कर तालाब की पूजा-अर्चना की। तालाब हिलोरने वाले भाई बहनों को तिलकलगाया। उसके बाद भाई बहन ने तालाब में प्रवेश कर मटके से संमुद्र मंथन किया। एक दूसरे को पानी पिलाया और भाइयों ने बहनों को चुंदरी ओढ़ाई। समाज के मांगीलाल व मीठाराम मीणा ने बताया कि करीब 30 वर्ष बाद 25 भाई बहिनों के जोड़ो ने समंदर हिलोरा। महिलाओं ने म्हारी सासुजी देरानी जेठानी माटी नौके….. समदरियो हिलोरा खाय… भादरवो झकोला खाय आदि मंगल गीत गाए। ढोल के आगे नृत्य किया। अंत में घूघरी मातर की प्रसादी वितरित की गई। इस मौके मीणा समाज के कई लोग मौजूद थे।


