
PALI SIROHI ONLINE
आज का हिन्दू पंचांग
⛅दिनांक – 21 अगस्त 2025
⛅दिन – गुरुवार
⛅विक्रम संवत् – 2082
⛅अयन – दक्षिणायण
⛅ऋतु – वर्षा
⛅मास – भाद्रपद
⛅पक्ष – कृष्ण
⛅तिथि – त्रयोदशी दोपहर 12:44 तक तत्पश्चात् चतुर्दशी
⛅नक्षत्र – पुष्य रात्रि 12:08 अगस्त 22 तक तत्पश्चात् अश्लेशा
⛅योग – व्यतीपात शाम 04:14 तक तत्पश्चात् वरीयान्
⛅राहुकाल – दोपहर 02:19 से दोपहर 03:55 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)
⛅सूर्योदय – 06:18
⛅सूर्यास्त – 07:07 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त अहमदाबाद मानक समयानुसार)
⛅दिशा शूल – दक्षिण दिशा में
⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:49 से प्रातः 05:34 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)
⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:17 से दोपहर 01:08
⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:20 अगस्त 22 से रात्रि 01:05 अगस्त 22 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)
⛅️व्रत पर्व विवरण – मासिक शिवरात्रि, गुरुपुष्यामृत योग, सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:18 से रात्रि 12:08 अगस्त 22 तक)
⛅️विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
🔹अपने हाथ में ही अपना आरोग्य🔹
🔸१) सभी अंगों में पुष्टिदायक तेल की मालिश अवश्य करानी चाहिए सिर में कान में और पैरों में तो विशेष रूप से करानी चाहिए । कराने से वायु तथा कफ मिटता है, थकान मिटती है, शक्ति तथा सुख की प्राप्ति होती है, नींद अच्छी आती है, शरीर का वर्ण सुधरता है, शरीर में कोमलता आती है, आयुष्य की वृद्धि होती है तथा देह की पुष्टि होती है ।
🔸(२) सिर में मालिश किया हुआ तेल सभी इन्द्रियों को तृप्त करता है, दृष्टि को बल देता है, सिर के दर्दों को मिटाता है। बाल में तेल पहुँचने से बाल घने, लम्बे तथा मुलायम होते हैं । लंबे समय तक टिकते हैं और बाल काले बने रहते हैं तथा सिर को भी भरा हुआ रखता है ।
🔸(३) नित्य कान में तेल डालने से कान में रोग या मैल नहीं होता । गले के बाजू की नाड़ी तथा दाढ़ी अकड नहीं जाती । बहुत ऊँचे से सुनना या बहरापन नहीं होता । कान में रस आदि पदार्थ डालने हों तो भोजन से पहले डालना हितकर है ।
🔸(४) पैरों पर तेल मसलने से पाँव मजबूत होते हैं। नींद अच्छी आती है, आँख स्वच्छ रहती है तथा पैर झूठे नहीं पड़ जाते, श्रम से अकड़ नहीं जाते, संकोच प्राप्त नहीं करते तथा फटते भी नहीं । जिस तरह गरुड़ के पास साँप नहीं जाते उसी तरह कसरत के अभ्यासी और तेल की मालिश करानेवाले के पास रोग नहीं जाते । नहाते समय तेल का उपयोग किया हो तो वह तेल रोंगटों के छिद्रों, शिराओं के समूह तथा धमनियों के द्वारा सम्पूर्ण शरीर को तृप्त करता है तथा बल प्रदान करता है ।
🔸(५) जिस तरह मूल में सिंचित वृक्षों के पत्ते आदि वृद्धि प्राप्त करते हैं उसी तरह अंगों पर तेल मलवानेवाले मानवों की तेल से सिंचित धातुएँ पुष्टि प्राप्त करती हैं ।
🔸(६) बुखार से पीड़ित, कब्जियतवाले, जिसने जुलाब लिया हो, जिसे उल्टी हुई हो, उसे कभी भी तेल की मालिश नहीं करनी चाहिये ।
🔸(७) मुँह पर तेल मलने से आँखें मजबूत होती हैं, गाल पुष्ट होते हैं, फोड़े तथा फुन्सियाँ नहीं होती और मुँह कमल के समान सुशोभित होता है ।
🔸(८) जो मनुष्य प्रतिदिन आँवले से स्नान करता है उसके बाल जल्दी सफेद नहीं होते और वह सौ वर्ष तक जीवित रहता है ।
🔸(९) दर्पण में देहदर्शन करना यह मंगलरूप है, कांतिकारक है, पुष्टिदाता है, बल तथा आयुष्य को बढ़ाने वाला है और पाप तथा अलक्ष्मी का नाश करनेवाला ।
🔸(१०) जो मनुष्य सोते समय बिजोरे के पत्तों का चूर्ण शहद के साथ चाटता है वह सुखपूर्वक सो सकता है ।


