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हनुमान सिंह राव
बाली उपखण्ड के बीजापुर के निकट श्रावण का दुसरा सोमवार और अरावली की पर्वत श्रृंखला के प्राकृतिक रूप में विराजमान नगरेश्वर महादेव के दर्शन मे उमड़ा जनसैलाब।
बीजापुर से करीब सात कि.मी. दुरी पर स्थित नगरेश्वर महादेव का दर्शनीय स्थल प्राकृतिक रूप में देखने लायक है यह मंदीर प्राचीन और गुफा मंदीर बना हुआ है यहाँ की शिवलींगाकार करिब पांच फिट की है इस प्राकृतिक मंदीर मे पहले बेठ कर जाना पडता था वर्तमान में नगरेश्वर महादेव मंदीर सेवा समिति द्वारा द्वारा गुफा मंदीर के आगे संगमरमर पत्थर का नविन मंदीर गुम्बद वाला बना रखा है इस मंदीर के साथ गुफा मंदीर के निचे खुदाई करने से अब इस मंदीर में खड़े हो कर जा सकते हैं
गुफा मंदीर के पास एक प्राकृतिक कुण्ड बना हुआ है जिसमें श्रृद्धालु नहाने का आनंद लेते हैं इस मंदीर मे श्रावण महिने मे एव शिवरात्रिऔर प्रत्येक सोमवार को भीड़ रहती है मंदीर तक पहुचने के लिए बीजापुर से रुपन माता तक निजी वाहन से पहुच कर आगे पेदल यात्रा करनी पडती है रास्ता दुर्गम और पत्थरीला है लेकिन हरियाली और कल कल बहती नदी एव झरने और वन्य पशुओं पक्षियों की मधुर आवाजे दर्शनार्थियों को आकर्षित करती है
प्राकृतिक वातावरण में लोगों को एक पर्यटक स्थल के रूप में देख कर यहा आने के लिए लालायित रहते हैं नगरेश्वर महादेव सेवा समिति द्वारा श्रावण महिने में भोजनालय मे नि:शुल्क भोजन व्यवस्था कर रखी है जिसमें हजारो श्रृदालु भोजन प्रसाद ग्रहण करते हैं
नगरेश्वर महादेव मंदीर मे सेवा के रूप में राजपुरोहित समाज के और माली समाज के साथ बीजापुर के नवयुवक अपनी सेवा देते हैं
इस मंदीर के आगे अरावली की तलहटी गोडवाड़ का हरिद्वार हर हर गंगे का तीर्थ स्थल आया हुआ है और यहाँ से एक किमी चढाई पर हिंगलाज माता जी का गुफा मंदीर आया हुआ है इन प्राकृतिक दर्शनीय स्थल पर श्रृदालुओ का ताता लगा रहता है
गोडवाड़ के हरिद्वार हर हर गंगे तीर्थ पर गो मुख से सदीयों से अनवरत सतत् जल धारा बहती रहती है
यहाँ के पुजारी बाबुलाल गर्ग बताया कि जो व्यक्ति हरिद्वार नही जाते वे अपने पुर्वज की अस्तियाँ यहाँ प्रवाहित करते हैं कुछ जातीयो के लोग अपने मृत पुर्वज की अस्तियाँ प्रवाहित करते हैं यहाँ वेशाक पुर्णिमा को मेला आयोजित होता है
श्रृदालुओ द्वारा यहा का जल अपने घर ले जाते हैं और पुजा अर्चना मे उपयोग लेते हैं
किवदंती है भाटुन गाँव के हरिया नामक ब्राह्मण मां गंगा के दर्शन और स्नान करने हरिद्वार जाता था उसके वृद्ध अवस्था को देख मां गंगा अरावली केपर्वतीय क्षेत्र में बीजापुर के निकट प्रकट हुई तभी से अनवरत जल धारा प्रवाहित हो रही है बताया जाता है कि भीषण अकाल मे भी यहाँ की जल धारा अनवरत जारी रही थी यह स्थान वन्य जीव जन्तुओं के लिए पेयजल का प्रमुख जल स्रोत है यहाँ मंदीर के आगे दो कुण्ड बने हुये हैं जिसमें पुज अर्चना और पेयजल के उपयोग में आते हैं वही मंदीर के बहार दो कुण्ड और एक कुण्डी बनाई हुई है कुण्ड नहाने के लिए और कुण्डी मे अस्ति विर्सजन किया जाता है।






