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बाडमेर-बालोतरा जिले में रविवार की रात जिस आस्था और उत्साह के साथ शुरू हुई थी, उसने सोमवार की सुबह बालोतरा जिले की मेघवालों की बस्ती (कानोड) पंचायत को जीवनभर का सबसे गहरा और कभी न भरने वाला जख्म दे दिया। अपने कुलदेवता भोमियाजी के दर्शन कर घर लौट रहे आठ दोस्तों की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं। जोधपुर के ओसियां (पड़ासला) से लौटते समय हुए एक भीषण सड़क हादसे ने पांच घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझा दिए, जबकि तीन युवक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।
इस हादसे के बाद पूरे गांव में ऐसा सन्नाटा पसरा है कि मानो वक्त ठहर गया हो। घरों से उठती चीत्कारें और अपनों की राह देखती पथराई आंखें इस त्रासदी की गवाही दे रही हैं। सोमवार को गांव के किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला और पूरे क्षेत्र ने नम आंखों से पांचों युवाओं को अंतिम विदाई दी।
आधी रात को डंपर में जा घुसी तेज रफ्तार एसयूवी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कानोड की मेघवालों की बस्ती के रहने वाले आठ दोस्त रेवंताराम, भरत, स्वरूपाराम, किशन, भावेश, मुकेश, हेमाराम और बाबूराम बालोतरा व पचपदरा क्षेत्र में मजदूरी, ड्राइविंग और पढ़ाई करके अपने परिवार का संबल बने हुए थे। रविवार का अवकाश होने के कारण सभी ने ओसियां स्थित कुलदेवता भोमियाजी के दर्शन का मन बनाया था। किसी को इस बात का अंदेशा भी नहीं था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी।
दर्शन करने के बाद जब वे देर रात वापस लौट रहे थे, तभी भांडियावास सरहद में कुडी गांव के पेट्रोल पंप के सामने यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उनकी तेज रफ्तार एसयूवी पहले एक अज्ञात वाहन से टकराई और फिर अनियंत्रित होकर आगे चल रहे एक डंपर में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि एसयूवी के परखच्चे उड़ गए।
हादसे में रेवंताराम पुत्र गेनाराम (26), भरत पुत्र बन्नाराम (25) और स्वरूपाराम पुत्र मेहराराम (27) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। स्वरूपाराम का शव गाड़ी में इस कदर फंस गया था कि पुलिस और ग्रामीणों को उसे बाहर निकालने में करीब दो घंटे की मशक्कत करनी पड़ी।
अस्पताल ले जाते समय दो और दोस्तों ने तोड़ा दम
हादसे के बाद चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों ने गंभीर रूप से घायल किशन पुत्र शेराराम (27), भावेश पुत्र कलाराम (19), हेमाराम पुत्र जीयाराम (23), मुकेश पुत्र मेहराराम (22) और बाबूराम पुत्र अर्जुनराम (22) को तुरंत बालोतरा के नाहटा अस्पताल पहुंचाया।
प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें जोधपुर रेफर कर दिया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; जोधपुर ले जाते समय रास्ते में किशन और भावेश ने भी दम तोड़ दिया। वर्तमान में हेमाराम, मुकेश और बाबूराम का इलाज अस्पताल में चल रहा है, जहां उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
एक ही आंगन के तीन लाल छिन गए
इस भीषण हादसे का सबसे क्रूर प्रहार एक ही संयुक्त परिवार पर हुआ है। जान गंवाने वाले भरत, स्वरूपाराम और भावेश आपस में चाचा-ताऊ के बेटे भाई थे। एक ही घर के तीन जवान बेटों के शव जब एक साथ आंगन में पहुंचे, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक उठीं।
वहीं दूसरी ओर, रेवंताराम और किशन न केवल पड़ोसी थे बल्कि बचपन के जिगरी दोस्त भी थे। दोनों ने साथ में पढ़ाई की, साथ में बड़े हुए, रोजगार के लिए साथ संघर्ष किया और रविवार को भगवान के दर पर भी साथ ही गए थे। उनकी यह अटूट दोस्ती मौत के बाद भी नहीं छूटी और दोनों ने एक ही दिन दुनिया को अलविदा कह दिया।
एक अधूरा रह गया वादा
बालोतरा के डॉ. दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने भारी मन से बताया कि रविवार रात करीब 8:30 बजे उनकी रेवंताराम से फोन पर बात हुई थी। रेवंताराम ने बड़े उत्साह से कहा था कि वे दर्शन करके निकल चुके हैं और सोमवार सुबह उनसे आकर मिलेंगे। लेकिन सुबह मुलाकात की जगह रेवंताराम की मौत की खबर आई, जिससे यह वादा हमेशा के लिए अधूरा रह गया।
अधूरे रह गए सपने, चौपालों पर पसरा सन्नाटा
हादसे का शिकार हुए इन पांच युवकों में से केवल स्वरूपाराम ही विवाहित थे। उनका विवाह पांच साल पहले हुआ था और उनकी कोई संतान नहीं थी। बाकी चारों युवक अविवाहित थे, जो अभी अपने जीवन की शुरुआत ही कर रहे थे। कोई अपने बूढ़े माता-पिता का सहारा बनने के लिए मजदूरी कर रहा था, तो कोई बेहतर भविष्य के सपने संजोकर पढ़ाई में जुटा था। लेकिन इस एक हादसे ने उन सभी मासूम सपनों को हमेशा के लिए कुचल दिया।
सोमवार सुबह जैसे ही हादसे की खबर गांव में फैली, चारों तरफ कोहराम मच गया। कोई अपनों को ढूंढने अस्पताल की तरफ भागा तो कोई घटनास्थल की ओर। शवों के गांव पहुंचने से पहले ही चौपालों पर हजारों की भीड़ जमा हो गई। पूरे प्रशासनिक अमले और ग्रामीणों की मौजूदगी में पांचों दोस्तों का अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना ने न केवल मेघवालों की बस्ती बल्कि पूरे बालोतरा जिले को झकझोर कर रख दिया है।

