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आबूरोड-उर्स के अवसर पर गुजरात से आए मौलाना सैयद जावेद कादरी ने तकरीर पेश की। उन्होंने कहा कि इस्लाम मजहब ने हमेशा प्यार, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया है। मौलाना ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि इस्लाम दुनिया का पहला मजहब है, जिसने औरतों को सबसे पहले उनके हक और सम्मान दिलाने का काम किया। उनकी बातों को मौजूद अकीदतमंदों ने गंभीरता से सुना।
कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना रिजवान अहमद ने कुरान-ए-पाक की तिलावत से की। इसके बाद उन्होंने ‘नाते रसूल’ पेश की, जिसकी शुरुआत मशहूर पंक्तियों ‘सरवर कहूं के मालिके मौला कहूं तुझे…’ से हुई। स्थानीय मौलानाओं ने भी नाते रसूल प्रस्तुत कर माहौल को रूहानी बना दिया।
देश में अमन और भाईचारे की दुआएं
तकरीर और नात के बाद सलातो सलाम पेश किया गया। इस दौरान देश में अमन, शांति और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। मंच संचालन मुल्तानिया मस्जिद के मौलाना रिजवान अहमद ने किया।
समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता
उर्स के आयोजन में मुस्लिम वक्फ कमेटी के सदर सलीम खान पठान, नगर अध्यक्ष नरगिस कायमखानी, कांति परिहार, अर्जुन सिंह, शमशाद अली अब्बासी सहित कई स्थानीय पार्षद और भामाशाह मौजूद रहे। दरगाह कमेटी के सदर शरीफ मोहम्मद ने सभी अतिथियों का फूल-माला और शॉल पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाएं हुसैनी नौजवान कमेटी ने संभालीं।
लंगर और गुस्ल की रस्म के साथ समापन
उर्स के मौके पर रविवार को लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सर्वधर्म के लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और दुआएं मांगीं। रविवार देर शाम गुस्ल की रस्म अदा की गई, जिसके साथ उर्स का समापन हुआ।

