आबूरोड के सियावा में गणगौर का मेलाः पारंपरिक वेशभूषा में शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना, जमकर हुई खरीददारी
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आबूरोड, सिरोही-आबूरोड के पास सियावा गांव में आदिवासी क्षेत्र का प्रसिद्ध गणगौर मेला मंगलवार को आयोजित किया गया. इस मेले में आबूरोड तहसील के आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ गुजरात और राजस्थान के आदिवासियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। आदिवासी समुदाय के लोग टेंपो, दुपहिया वाहनों और निजी साधनों से मेले में पहुंचे।
भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित
सियावा गांव में आयोजित यह गणगौर मेला आदिवासी गरासिया समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है, जिसमें आदिवासी पूर्ण श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं।
पति की लंबी उम्र के लिए रखा व्रत
गणगौर पर्व को सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए माता गौरी की आराधना करती हैं। यह पर्व राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मूल्यों को सहेजने का संदेश भी देता है।
पारंपरिक नृत्यों का किया आयोजन
मेले में आदिवासी लोकगीत और पारंपरिक नृत्यों का आयोजन किया गया, जिसने माहौल को जीवंत बना दिया। इसके साथ ही, एक हाट बाजार भी लगा, जहां लोगों ने जमकर खरीदारी की। पर्व के समापन पर शिव-पार्वती की सवारी निकाली गई और मूर्तियों का विसर्जन किया गया।
