• April 21, 2026

सिंदरू के युवक ने 7 लोगों के विरुद्ध समाज से बहिष्कृत करने का मामला करवाया दर्ज, सांडेराव पुलिस ने जांच शुरू की

PALI SIROHI ONLINE

खीमाराम मेवाडा

पाली-समाज से बहिष्कृत करने के आरोप मे 7 पंचो के विरूद्ध परिवाद दर्ज,साण्डेराव पुलिस ने जांच की शुरू

तखतगढ 21 अप्रैल (खीमाराम मेवाडा) पुलिस थाना अन्तर्गत सिन्दरु निवासी व्यक्ति ने पुलिस थाना साण्डेराव अपने ही समाज के पंच पटेलो द्वारा समाज से बहिष्कत कर समाज के गांव, समस्त रिस्तेदार और बहिन बेटियो अथवा परिवार से कोई भी समाज का व्यक्ति प्रार्थी के घर आना जाना या व्यवहार रखता है जो उसको भी समाज से बहिष्कृत कर दण्डित किया जाने का फरमान जारी करने के आरोप मे 7 पंचों के खिलाफ नामदज परिवाद दर्ज करवाया है। पुलिस ने प्रार्थी की रिपोर्ट पर परिवाद दर्ज कर जांच लक्ष्मणसिंह उपनिरीक्षक के जिम्में  कर दी गई है।

पुलिस के अनुसार प्रार्थी बगदाराम पुत्र धन्नाराम मेघवाल निवासी सिन्दरु द्वारा पेश की गई रिपोर्ट मे आरोप है की 2/3/26 को हमारे गाँव सिन्दरू में हमारी समाज के सभी पंच पोल में एकत्रित होकर पुखराज पुत्र खंगाराराम मेघवाल गोत्र मोबरसा और दुदाराम पुत्र
मोतीराम मेघवाल गोत्र दादालिया ने हमे बताया की शीतला सप्तमी के बाद से बगदाराम पुत्र धन्नाराम मेघवाल गोत्र मोबरसा को सुमालिया पट्टा के मुख्य पंचो की तरफ से ओलबा है। और जब तक ये समाज में दंड भरकर और समाज को खाना नहीं खिलाते है तब तक समाज में इनका आना जाना और हुक्का पानी बंद रहेगा न कोई बेन बेटी इनके घर आएगी और नहीं समाज का कोई भी व्यक्ति इनसे व्यवहार करेगा

यदि कोई व्यक्ति करता है। तो उनको भी समाज का दंड भुगतना पड़ेगा और उसको भी समाज से बहिष्कृत किया जाएगा। इस से पूर्व मे पंचो द्वारा इसी तरह सिन्दरू निवासी मोहनलाल दादलिया को फरमान जारी करने से आखिर परेशान होकर उसे आत्महत्या करने पडी। दुसरे के मै खिमाडा निवासी तुलसाराम मेघवाल के पुत्र नरेश की चुंडा निवासी बालिग लडकी दोनो ने अपनी मर्जी से शादी करने की भटक लगते ही पंचो ने तुलसाराम को समाज से ओलबा देने एव दण्डित करने का दबाव बनाया आखिर तुलसाराम ने परेशान होकर दण्ड भरा ओर खाना भी खिलाया।

जबकि शादी करने वाली लड़की बार-बार चिल्ला रही थी कि मैं अपनी मर्जी से शादी कर आई हु। लेकिन पंचों ने एक नहीं सुनी। केस तीसरा- मेरे परिवार में ग्राम सिन्दरु में मेरे काकाजी के पुत्र घिसाराम पुत्र  कलाराम मेघवाल ने अपनी इच्छा से एक बालिग लड़की से दोनों ने आपसी रजामंदी और स्वविवेक से अपना भला बुरा सोच समझ कर शादी की थी जिसमे दोनों के माता पिता को कोई एतराज नहीं था लेकिन पंचो को ये मंजूर नहीं था और उनको परेशान करने लगे, वो नही चाहते हुए भी उन्होंने पंचो को 11000/- रूपये दंड राशी भरनी पड़ी कानून बालिग लड़के और लड़की को स्वविवेक से शादी करने की स्वतन्त्रता देता है मगर हमारे पंचो को ये मंजूर नहीं है।

केस चतुर्थ- हमारे समाज के युवाओ ने मिल कर एक सामाजिक संस्था सुमालिया पट्टा मेघवाल विकास संस्था का गठन जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रतिभावान समारोह का आयोजन करना साथ ही केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं से लोगों को जोड़ना और उन योजनाओ मिलने वाले लाम के बारे में लोगों को समजाना जिससे उनको पूरा लाभ मिल सके और समाज के बुजुर्ग जिनके बच्चे नहीं है। उनकी सेवा करना हमारी संस्थान  का मकसूद था। वह भी पंचो को रास नही आया तो संस्थान के पदाधिकारीयो पर भी ओलबा देने की कोशिश की पंच नही चाहते थे की संस्थान चले ओर परेशान होकर संस्थान बंद हो जाएगी। ओर संस्थान  के कागजात मांग कर पदाधिकारीयो को ओलबा देने पर तुले रहे बाद
अगला शिकार मुझे बना दिया है, पंचो ने मुझे समाज से बहिष्कृत कर, मेरे मान सम्मान को ठेस पहुंचाई है मुझे समाज में अपमानित किया जा रहा, मेरे जीवन जीने के अधिकार को ये मुझसे छीनना चाहते है और मुझे सुनने में आया है की पंच बोल रहे है की जो हाल मोहन लाल का किया वो ही हाल बगदाराम का करेंगे। ताकि समाज का कोई व्यक्ति पंचो के खिलाफ न जाये ।

अतः श्री मान से करबध्द निवेदन है कि मुझ प्रार्थी को इन मुख्य पंच-1. घिसुलाल उर्फ घीसाराम पुत्र वजाराम मेघवाल निवासी बिरामी, 2. मूलाराम पुत्र पोकरराम मेघवाल निवासी बिरामी, 3. पकाराम पुत्र अचलाराम मेघवाल निवासी बिरामी, 4. देशाराम पुत्र केराजी मेघवाल निवासी सांडेराव, 5. कुकाराम पुत्र  टेकाराम  मेघवाल निवासी सांडेराव, 6. सांकलाराम पुत्र ओटाराम मेघवाल  निवासी दुजाना, 7. दुदाराम पुत्र मोतीराम मेघवाल निवासी सिन्दरू से निजात दिलाये और मेरा जीवन बर्बाद होने से बचाये और इनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही कर मेरे और मेरे बाल बच्चो पर दया करे ताकि मोहन लाल जैसा हाल मेरा न हो और ये मेरे जीने के अधिकार को न छिन सके ।

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