• April 20, 2026

अटूट प्रेम की मिशाल: पत्नी की मौत का सदमा नहीं सह सका पति, एक ही चिता पर दाह संस्कार

PALI SIROHI ONLINE

भीलवाडा-भीलवाड़ा। कहते हैं जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं, लेकिन मांडल कस्बे में एक ऐसी जोड़ी ने इस कहावत को हकीकत में बदल दिया। जिसका साथ जिंदगी तो क्या, मौत भी नहीं छुड़ा सकी। दशकों तक एक-दूसरे का हाथ थामकर सुख-दुख साझा करने वाले बुजुर्ग दंपती ने कुछ ही घंटों के अंतराल में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। जब उनकी अंतिम विदाई हुई, तो श्मशान में भी वे अलग नहीं हुए और एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।कस्बे के तालाब की पाल स्थित हनुमान मंदिर के सामने रहने वाले गणेश माली (64) और उनकी पत्नी लाली बाई (60) के बीच प्रेम का ऐसा गहरा बंधन था कि मोहल्ले वाले अक्सर उनकी मिसाल देते थे। शुक्रवार रात को भी सब कुछ सामान्य था।

मृतक के भाई नारायण माली जब रात को घर आए।तब दोनों छत पर बैठकर इत्मीनान से बातें कर रहे थे। किसी को आभास नहीं था कि यह उनकी आखिरी गुफ्तगू है।देर रात अचानक तबीयत बिगड़ने से लाली बाई ने प्राण त्याग दिए। जीवनसंगिनी के बिछोह का सदमा कहे या नियति का विधान, पत्नी की मृत्यु के कुछ ही देर बाद गणेश माली की धड़कनें भी हमेशा के लिए शांत हो गईं। शनिवार सुबह जब नारायण उन्हें जगाने पहुंचे, तो दोनों अचेत मिले। जब तक चिकित्सा मदद पहुंचती, तब तक यह जोड़ा अनंत यात्रा पर निकल चुका था। जैसे ही यह खबर कस्बे में फैली। शोक की लहर दौड़ गई।

गमगीन माहौल में अंतिम विदाई

शनिवार दोपहर को ब्यावर मार्ग स्थित श्मशान घाट पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। माली समाज सहित कस्बे के प्रबुद्धजनों की मौजूदगी में दोनों का एक ही चिता पर दाह संस्कार किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि गणेश माली और लाली बाई के बीच गहरा लगाव था। अक्सर उन्हें साथ ही देखा जाता था। लोगों का कहना है कि सौभाग्यशाली लोगों को ही ऐसा साथ नसीब होता है कि मृत्यु भी उन्हें जुदा नहीं कर पाई।

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