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खीमाराम मेवाडा
तखतगढ़ नगर पालिका में लगातार दूसरी बार भी बोर्ड का कार्यकाल बीता, समस्याएँ “जस की तस” : धरातल पर तखतगढ़ मे आज भी कई वार्डवासी बुनियादी सुविधाओं से वंचित
तखतगढ 4 जनवरी (खीमाराम मेवाडा) सुमेरपुर उपखंड क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी नगरपालिका तखतगढ़ कहलाती है। और वर्ष 1974 में पंचायत से क्रमोन्नत कर नगरपालिका का दर्जा दिया गया था। आज लगभग पचास वर्षों का सफर तय कर चुकी है। इसके बावजूद भी नगर की तस्वीर आज भी विकास के दावों से कोसों दूर नजर आ रही है। जबकि सत्ताधारी बोर्ड का दूसरा कार्यकाल समाप्ति की ओर देख रही है। लेकिन जनता की समस्याएँ कई वार्डों मे आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
पेयजल समस्या : हर घर नल, सिर्फ कागजों में
नगर में पेयजल व्यवस्था सबसे बड़ी और गंभीर समस्या बनी हुई है। जहां गर्मी के महीनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। कई वार्डों में हफ्तों तक नलों में पानी नहीं आता, जबकि कुछ इलाकों में गंदा व बदबूदार पानी सप्लाई किया जा रहा है। मजबूरन आमजन को महंगे दामों पर टैंकरों से पानी खरीदना भारी पड़ता देखा गया है। जबकि वर्तमान में केंद्र से लेकर राज्य तक डबल इंजन की सरकार होते हुए भी करोड़ों की योजनाओं और “हर घर नल” जैसे नारों के बावजूद धरातल पर स्थिति अति गंभीर चिंताजनक बनी हुई है।
पानी निकासी की समस्या पर हो रहे वादों पर वादे : बरसात के मौसम में तो नगर के कई वार्ड समुद्र का रूप लेने से कोई नहीं रोक सकता। और
तखतगढ़ के रामकावावास से नाग चौक,धारावाहिक,नागचौक,खाचरियावास,नहेरू रोड,महावीर बस्ती की सड़कों पर जलभराव आम समस्या बनी हुई है। समुचित नालियों और ड्रेनेज सिस्टम के अभाव में घरों, दुकानों और गलियों तक पानी भर जाता है। इससे न केवल आवागमन बाधित होता है। बल्कि मच्छरों के प्रकोप और कई संक्रामक गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। वर्षों से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। फिर भी चुनावी मौसम मे वोटो की खातिर वादो पर वादे किए जा रहे है।
बायपास सड़क : सिर्फ घोषणाओं तक सीमित
नगर के बीच से गुजरने वाला भारी यातायात आए दिन बन रहा जाम और दुर्घटनाओं का कारण
तखतगढ़ नगर से बीते कई वर्षों से बायपास सड़क की मांग की जा रही है। की तखतगढ से जोडने वाले आहोर तहसील के कई गांवो से आवागमन मे भारी वाहन भी मुख्य बाजार से गुजरने से कहीं मतॅबा दुर्घटनाएं हो चुकी है। दुसरी और ब्यावर पिंडवाड़ा नेशनल हाईवे स्थित पिरामिड टोल प्लाजा को बचाने के चक्कर में भारी वाहन चालकों द्वारा केनपुरा से कोसेलाव एवं राजपुरा होते हुए तखतगढ़ नेहरू रोड होते हुए नया बस स्टैंड से होकर जालौर की ओर आवागमन करने पर भी कई मतलब बड़ी दुर्घटना हो चुकी है।
लेकिन आज तक यह मांग फाइलों और चुनावी घोषणाओं से आगे नहीं बढ़ सकी। बायपास के अभाव में आमजन, व्यापारी और स्कूली बच्चो को भी भारी परेशानीयो से गुर्जर ना पढ़ रहा हैं।
कच्ची बस्तियाँ और एससी-एसटी मोहल्ले : विकास से कोसों दूर
नगर की कई कच्ची बस्तियाँ और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति बहुल मोहल्ले आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। कई इलाकों में पक्की सड़कें, नालियाँ, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई जैसी सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं। सरकारी योजनाएँ होने के बावजूद इन वर्गों तक उनका पूरा लाभ नहीं पहुँच पा रहा है। जो सामाजिक न्याय के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
धरातल पर विकास बनाम वास्तविकता
तखतगढ़ कभी राजस्थान की सबसे धनाढ्य पंचायतों में गिना जाता था। पंचायत काल में उपलब्ध बहुमूल्य भूमि से कस्बे का सुनियोजित विकास संभव था। लेकिन नगरपालिका बनने के बाद उस संपत्ति का दुरुपयोग और मनमाना हस्तांतरण होता चला गया। नतीजा यह रहा कि संसाधन होने के बावजूद कस्बा आज बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है।
बिना बोर्ड की स्वीकृति से कोटेशन पर कोटेशन का मामला भी सुर्खियों में
नगर पालिका में लगातार बने दूसरी बार सत्ताधारी बोर्ड के कार्यकाल में भी विकास कार्यों को लेकर बिना बोर्ड के सक्षम स्वीकृति से कोटेशन पर कोटेशन निकाल कर जनप्रतिनिधियों से लेकर नोकरशाहो तक अन्य नाम से फर्म बनाकर ठेके लेकर मिल बाटकर सरकारी धन का दुरुपयोग करने एव फर्जी पट्टो की पत्रावलिया गुम होने का मामला भी इन दिनों चर्चा में चल रहा है। जिसको लेकर 2 महीना पूर्व ही नगर पालिका के उपाध्यक्ष मनोज नामा ने संबंधित विभागों को संपूर्ण जांच एवं मामला दर्ज करवाने की भी मांग कर रखी हैं।
जनता का सवाल
लगातार दशकों से एक ही
राजनीतिक दल के शासन के बावजूद यदि पेयजल उपलब्ध नहीं, जल निकासी की व्यवस्था नहीं, बायपास सड़क नहीं, और कमजोर वर्ग आज भी सुविधाओ से उपेक्षित हैं। तो यह विकास किसके लिए हुआ। तखतगढ़ की जनता आज यह सवाल पूछ रही है कि क्या हर बार चुनाव के बाद सिर्फ बोर्ड बदलेंगे, या कभी हालात भी बदलेंगे।


