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बागरा-रविवार को कस्बे में सुधार समाज ने 20 साल बाद तालाब हिलोरने की परंपरा निभाई। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग जुटे। ढोल-नगाड़ों की धुन पर महिलाएं सिर पर कलश लेकर चलींपुरुषों ने केसरिया साफा बांधा। मंगल गीतों की गूंज के बीच कदम तालाब की ओर बढ़े। लंबे इंतजार के बाद रस्म फिर से होने की खुशी लोगों के चेहरे पर दिखी।
इस दौरान 150 महिलाओं ने समंदर हिलोरने की परंपरा निभाई। भाई-बहनों का रैला उमड़ा। भाई ने विधि-विधान से बहनका मटका हिलाया। चुनरी ओढ़ाकर गूगरी मात्तर खिलाया। दोनों ने एक-दूसरे की रक्षा का वचन लिया। मौजूद लोगों ने तालाब की सात परिक्रमा की। समाजसेवी भंवरलाल सुथार ने कहा कि 20 साल बाद इसका आयोजन समाज को जड़ों से जोड़ने का प्रतीक है।


