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जालोर-जालोर के सांचौर में बहुचर्चित जालम सिंह हत्याकांड में मुख्य आरोपी भागीरथ विश्नोई की दूसरी जमानत याचिका भी राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने खारिज कर दी। न्यायाधीश जस्टिस मुकेश राजपुरोहित ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 25 सितंबर 2026 को यह आदेश दिया। मामले की सुनवाई अपर सेशन न्यायाधीश, सांचौर की अदालत में चल रही है।
15 लाख की मांग और जान से मारने की दी धमकी
जालम सिंह के पिता अनोप सिंह ने 18 अगस्त 2024 को सांचौर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जालम सिंह पहले हुबली में भागीरथ विश्नोई की लॉज में काम करता था। बकाया वेतन मांगने पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। अनोप सिंह का आरोप है कि बाद में भागीरथ ने लॉज से डोडा पोस्त पकड़े जाने के लिए जालम सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए 15 लाख रुपए मांगे और उसे जान से मारने की धमकी दी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 17 अगस्त 2024 को जालम सिंह सांगड़वा से सांचौर गया था। शाम तक घर नहीं लौटने पर पिता ने उसके मोबाइल पर फोन किया। अनोप सिंह के मुताबिक, फोन भागीरथ ने उठाया और 15 लाख रुपए पहुंचाने को कहा। इसके बाद जालम सिंह ने फोन पर पिता को बताया कि उसके साथ मारपीट की जा रही है। पुलिस ने मामले में भागीरथ और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट पेश की थी।
हाईकोर्ट ने खारिज की विश्नोई की दूसरी जमानत याचिका
हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने दलील दी कि भागीरथ को दुश्मनी के कारण झूठा फंसाया गया है। उसने यह भी कहा कि मृतक के शरीर पर मिली 40 चोटों में कोई गंभीर प्रकृति की नहीं थी और आरोपी अगस्त 2024 से जेल में है। वहीं, परिवादी की ओर से अधिवक्ता निखिल भंडारी ने जमानत का विरोध करते हुए गवाहों के बयानों और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने अदालत को बताया कि अब तक दर्ज आठ गवाहों के बयान आरोपी के खिलाफ हैं और 18 अन्य गवाहों के बयान होना बाकी हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने भागीरथ विश्नोई की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी। हत्या के आरोपों पर अंतिम फैसला विचाराधीन मुकदमे में होगा।




