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खीमाराम मेवाडा
कुटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी पट्टाधारक ने पुलिस गिरफ्तारी से बचने के लिए सेशन न्यायालय में अग्रिम जमानत का आवेदन किया पेश
न्यायालय ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण करने के बाद षड्यंत्र मानते हुए अग्रिम जमानत आवेदन को किया खारिज
नगरपालिका तखतगढ से पत्रावली भी गायब, कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी संदेहास्पद
तखतगढ 8 जुलाई ;(खीमाराम मेवाडा) तखतगढ नगर पालिका में प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत एक व्यक्ति द्वारा कुटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी पट्टा बनाने के आरोप लगाते हुए पूर्व पालिकाध्यक्ष एवं पार्षद अंबा देवी रावल सहित 7 पार्षदों द्वारा 12 जनवरी को पुलिस थाना तखतगढ़ में मामला दर्ज करवाने के बाद अब फर्जी पट्टाधारक ने पुलिस गिरफ्तारी से बचने के लिए अपर सेशन न्यायालय सुमेरपुर में अग्रिम जमानत का आवेदन पेश किया। जिस पर अपर सेशन न्यायाधीश पुखराज गहलोत द्वारा प्रार्थी / अभियुक्त कुयाराम पुत्र भीमाजी निवासी सैनिक कॉलोनी तखतगढ बनाम अप्रार्थी / राज्य राजस्थान सरकार जरिये अपर लोक अभियोजक को दिलाई गई अनुसंधान पत्रावली तलब कर उभय पक्ष की बहस सुनी गई तथा अनुसंधान पत्रावली का ध्यानपूर्वक अवलोकन के बाद न्यायालय ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण करने के बाद षड्यंत्र मानते हुए अग्रिम जमानत आवेदन को अस्वीकार करते हुए खारिज करने के आदेश जारी कर आदेश में कहां गया कि प्रार्थी/अभियुक्त कुयाराम की ओर से अग्रिम जमानत हेतु प्रार्थना पत्र धारा 438 दंड प्रक्रिया संहिता (धारा 482 बी.एन.एस.एस.) के तहत प्रस्तुत किया गया, जिसकी नकल विद्वान अपर लोक अभियोजक को दिलाई गई। अनुसंधान पत्रावली तलब की गई, उभय पक्ष की बहस सुनी गई तथा अनुसंधान पत्रावली का ध्यानपूर्वक अवलोकन किया गया। प्रकरण के संक्षिप्त तथ्य यह हैं कि परिवादिया श्रीमती अंबादेवी ने12 जनवरी को थाना तखतगढ में प्रथम सूचना इस आशय की प्रस्तुत की कि नगरपालिका क्षेत्र के गांवाई तालाब आगोर भूमि पर प्रशासन शहरों के संग अभियान 2021 के तहत नैनाराम पुत्र कुयाराम द्वारा गांव की बेशकीमती जमीन पर बदनियति रखते हुए फर्जी और झूठे दस्तावेज के आधार पर नगरपालिका तखतगढ़ में आवेदन पेश कर पट्टा बनवाया है, जबकि यह भूमि तालाब की आगोर भूमि है, राजस्व रेकर्ड में दर्ज गैर मुमकिन नाला, तालाब, नदी, बांध अथवा पायतन या अन्य कैचमेंट एरिया में किसी भी प्रयोजनार्थ आवंटन / नियमन किया जाना प्रतिबंधित है। भूखंड धारक के पिता व पुत्र ने मिलकर अन्य लोगों की मिलीभगत से पट्टा क्रमांक 2566 नैनाराम पुत्र कुयाराम के नाम बनवाया है जो फर्जी है… आदि। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस थाना तखतगढ में दर्ज है। जो अनुसंधानाधीन है। उक्त प्रकरण में गिरफ्तारी की आशंका से प्रार्थी / अभियुक्त ने यह अग्रिम जमानत आवेदन पेश किया है।
प्रार्थी / अभियुक्त कुयाराम के अधिवक्ता ने अपने अग्रिम जमानत आवेदन में उल्लेखित आधारों की पुनरावृत्ति करते हुए निवेदन किया कि प्रार्थी / अभियुक्त 71 वर्ष का है, उसे झूठा फंसाया जा रहा है, उससे कोई बरामदगी भी नहीं होगी, उसके पक्ष में 1966 में ग्राम पंचायत तखतगढ ने पट्टा जारी किया था और उसने सहमति पत्र पुत्र के नाम से दिया था। नगरपालिका तखतगढ़ ने उस भूखण्ड पर मौका देखा है। प्रार्थी / अभियुक्त के पुत्र नैनाराम को भूखंड को वाणिज्यिक प्रयोजनार्थ अपने हक में पट्टा करवाने हेतु दिनांक 23.05.2024 को 1,89,284 /- रूपये व प्लान अनुमोदन हेतु दिनांक 15.07.2024 को 1,28,000/- रूपये नगरपालिका तखतगढ द्वारा मांग किये जाने पर जमा करवाये हैं। सबसे हैरानी की बात है कि उपरोक्त राशि नगरपालिका द्वारा दिनांक 12.02.2024 को पट्टा निरस्त करने के बाद में इस राशि की मांग कर राशि जमा करवायी है और नया पट्टा पुराने पट्टे के आधार पर जारी किया है। इस प्रकार प्रार्थी/अभियुक्त कुयाराम को परेशान किया जा रहा है, वह गांव का मौजीज व्यक्ति है। अपने तर्कों के समर्थन में न्यायिक दृष्टांत 2016 (1) कि. लॉ.रि. (राज.) 9 श्यामसिंह बनाम राजस्थान राज्य, 2014 (1) कि.लॉ.रि. (राज.) 97 धापूदेवी बनाम राजस्थान राज्य, 2010 कि.लॉ.रि. (एस.सी.) 56 रविन्द्र सक्सेना बनाम राजस्थान राज्य, 2011 कि.लॉ.रि. (एस.सी.) 1 सिद्धाराम सतलिंगप्पा म्हेत्रे बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य, न्यायिक दृष्टांत प्रस्तुत कर निवेदन किया कि प्रार्थी / अभियुक्त को अग्रिम जमानत प्रदान की जावे। जिसका घोर विरोध करते हुए परिवादी के अधिवक्ता और अपर लोक अभियोजक ने निवेदन किया कि कुयाराम ने इस मामले में एक फर्जी पट्टा बनाया था जो पट्टा सं.994 था। नगरपालिका तखतगढ ने अपना रेकर्ड देखकर यह बताया कि ग्राम पंचायत तखतगढ़ ने 994 क्रमांक का कोई पट्टा जारी नहीं किया। इस प्रकार कुयाराम का फर्जी पट्टा था, इस फर्जी पट्टे के आधार पर कुयाराम ने अपना सहमति पत्र अपने पुत्र नैनाराम को दिया, नैनाराम द्वारा तालाब के कैचमेंट एरिये की जमीन का इन फर्जी पट्टा और सहमति पत्र के आधार पर वाणिज्यिक भूमि का पट्टा जारी करवाया। इसमें नगरपालिका तखतगढ के कर्मचारियों और अधिकारियों की सहमति है और प्रशासन गांवों के संग अभियान में यह पट्टा जारी करवाया है। सबसे महत्वपूर्ण बात कि इस मामले जो नैनाराम द्वारा वाणिज्यिक पट्टा पुराने पट्टे के आधार पर जारी करवाने की पत्रावली पेश की थी वह पत्रावली भी नगरपालिका तखतगढ से गायब हो गई। इसमें नैनाराम और प्रार्थी / अभियुक्त कुयाराम और नगरपालिका के कर्मचारियों की भूमिका है जो पूर्ण अनुसंधान से ही स्पष्ट होगी। कुयाराम से सहमति पत्र और पट्टा के संबंध में अनुसंधान करना है और बरामदगी करनी है कि पट्टे की कार्यवाही में फर्जी पट्टा क्रमांक 994 की फोटोप्रतियां पेश की, सहमति की फोटो प्रतियां पेश की. इसलिए गम्भीर अपराध है। अगर की अग्रिम जमानत हो गई तो इस मामले में जो बहुत बड़ा षड़यंत्र है उसका खुलासा नहीं होगा। गंभीर अपराध है, अतः अग्रिम जमानत आवेदन खारिज किया जावे। सुना गया, उभय पक्षों के तर्कों पर मनन किया गया, केस डायरी का अवलोकन किया। प्रार्थी / अभियुक्त के अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत न्यायिक दृष्टांतों का भी ससम्मान अवलोकन किया। इस मामले में नगरपालिका तखतगढ ने सीमांकन रिपोर्ट में जो मास्टर प्लान 2021 के अनुसार वस्तुस्थिति है उसमें नक्शा अनुसार तालाब कैचमेंट के उपर पौधारोपण हेतु आरक्षित है और इस भूमि पर पट्टा नहीं दिया जा सकता। नैनाराम ने अपने पिता प्रार्थी कुयाराम के नाम का पंचायत काल के दौरान जारी पट्टे में सीरियल नं. 994 पेश किया और शपथ पत्र भी पेश किया, जबकि रेकर्ड में उक्त सीरियल नं. 994 का पंचायत काल में कोई पट्टा बुक नहीं थी। इस प्लोट में एक तरफ चंदनमल गांधी का प्लोट व पट्टा है, जिसके दक्षिण दिशा में तालाब एरिया दिखाया है। नैनाराम के पिता कुयाराम के पट्टे में दक्षिण दिशा में तालाब का भाग बताया है और उत्तर दिशा में प्लोट बताया है, इससे स्पष्ट है कि चंदनमल गांधी की भूमि के जो दक्षिण दिशा में तालाब की भूमि बतायी है वहां प्रार्थी का प्लोट नहीं होकर दक्षिण में तालाब का एरिया है। इस प्रकार कुयाराम ने पट्टा सीरियल नं. 994 फर्जी बनाया है जो तालाब की कैचमेंट एरिये की भूमि में बनाया है, उसका सहमति पत्र अपने पुत्र के हक में जारी कर के 1966 के पट्टे के आधार पर नया कॉमर्शियल पट्टा जारी करवाने की सहमति दी है और नगरपालिका में जो पत्रावली थी जो नैनाराम द्वारा कॉमर्शियल पट्टा जारी करवाने हेतु पेश की थी वह पत्रावली भी मिल नहीं रही है। प्रार्थी / अभियुक्त कुयाराम से पट्टा सीरियल नं. 994 और सहमति पत्र बाबत अनुसंधान और बरामदगी किया जाना शेष होना बताया है। इसमें नगरपालिका तखतगढ के कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी संदेहास्पद बतायी है, जिसमें पट्टा निरस्त किये जाने के पश्चात भी नैनाराम से राशि जमा करा ली गई और पट्टा भी रजिस्टर्ड करवाया और प्लान अनुमोदन करवाया। इस प्रकार इस मामले में विस्तृत अनुसंधान होना है। तथ्यों और परिस्थितियों से इस मामले में बहुत बड़ा षड़यंत्र प्रतीत हो रहा है, जिसमें नगरपालिका के कर्मचारियों और अधिकारीगण की भूमिका भी संदेहास्पद है। मामले के समस्त तथ्यों-परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए गुणावगुण पर कोई टिप्पणी किये बिना प्रार्थी/अभियुक्त कुयाराम का यह अग्रिम जमानत आवेदन अस्वीकार किये जाने योग्य पाया जाता है।
