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आबूरोड, सिरोही। आबूरोड के गांधीनगर क्षेत्र स्थित प्रेम नगर में 11 वीं कक्षा की छात्रा मोमिना की हत्या के चर्चित मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायालय संख्या-1 ने आरोपी पिता फतेह मोहम्मद को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। छात्रा की मौत का मामला अप्रैल 2024 में सामने आया था, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था।
5 अप्रैल 2024 को छात्रा के चाचा अकरम ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उसके भाई फतेह मोहम्मद ने फोन कर उसे घर बुलाया। मौके पर पहुंचने पर उसकी भतीजी मोमिना घर के फर्श पर अचेत अवस्था में पड़ी मिली। पूछताछ में सामने आया कि पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी को लेकर पिता ने बेटी के साथ मारपीट की थी।
आरोप था कि फतेह मोहम्मद ने लकड़ी, थप्पड़ों और मुक्कों से मोमिना की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसे गंभीर अंदरूनी चोटें आईं। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आबूरोड अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
11 वीं की परीक्षा शुरू होने वाली थी
जांच में सामने आया था कि मोमिना की 11वीं कक्षा की परीक्षा शुरू होने वाली थी। परिवार के अनुसार पिता पढ़ाई को लेकर उस पर लगातार दबाव बना रहा था। घटना से पहले भी दो दिनों तक उसके साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई थी। मोमिना ने इससे पहले 10वीं बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की थी और वह आबूरोड के अर्बुद स्कूल में 11वीं कक्षा की छात्रा थी।
चाचा की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ था हत्या का मामला
घटना के बाद मोमिना के चाचा अकरम की शिकायत पर आबूरोड सिटी थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपी पिता फतेह मोहम्मद को गिरफ्तार कर जांच शुरू की। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था।
13 गवाहों और 30 दस्तावेजों के आधार पर हुई सुनवाई
मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए, 30 दस्तावेज और दो आर्टिकल साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फतेह मोहम्मद को दोषी माना।
अदालत ने सुनाई 10 साल की सजा
अपर सत्र न्यायालय संख्या-1 ने आरोपी फतेह मोहम्मद को 10 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाने के साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत का यह फैसला करीब दो वर्ष तक चली न्यायिक प्रक्रिया और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया।

