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खीमाराम मेवाडा
तखतगढ़ पालिका चुनाव रहा बेहद दिलचस्प, कई दिग्गज हुए धराशायी तो कईयों ने रचा इतिहास
तखतगढ़ 17 सितम्बर (खीमाराम मेवाडा) राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव 2026 में तखतगढ़ नगरपालिका के चुनाव परिणामों ने कस्बे की स्थानीय राजनीति में कई पुराने समीकरणों को बदलकर रख दिया है। चुनावी मैदान में कहीं वर्षों से मजबूत माने जाने वाले राजनीतिक गढ़ ढह गए तो कहीं नए चेहरों ने जीत का परचम लहराकर अपनी राजनीतिक पारी की मजबूत शुरुआत की। वहीं कई स्थापित नेताओं और राजनीतिक परिवारों को मतदाताओं ने ऐसा झटका दिया, जिसकी चर्चा लंबे समय तक स्थानीय राजनीति में होती रहेगी।
इस चुनाव में कई वार्डों के परिणाम सामान्य नहीं रहे, बल्कि उन्होंने तखतगढ़ की राजनीति में नए अध्याय जोड़ दिए। खास तौर पर पति-पत्नी की जीत, दादी-पोते की हार, पूर्व चेयरमैन और राजनीतिक परिवारों के प्रत्याशियों की हार, वर्षों पुराने भाजपा के मजबूत गढ़ों में कांग्रेस की सेंध तथा वार्ड 22 में नाम वापसी के अंतिम दिन हुआ अप्रत्याशित घटनाक्रम पूरे चुनाव के सबसे चर्चित पहलू रहे।
पति-पत्नी की जोड़ी ने रचा नया इतिहास
कस्बे के नाग चौक क्षेत्र के वार्ड संख्या 16 और 19 के परिणाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। यहां से सरोज मेवाड़ा और अनराज मेवाड़ा पति-पत्नी के रूप में अलग-अलग वार्डों से चुनाव मैदान में उतरे और दोनों ने जीत हासिल की।
एक ही चुनाव में पति-पत्नी के अलग-अलग वार्डों से निर्वाचित होने को तखतगढ़ की स्थानीय राजनीति में एक नया इतिहास माना जा रहा है। इस जीत के साथ मेवाड़ा दंपती ने नगर की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।
दादी-पोते की जोड़ी को मिली शिकस्त
जहां एक ओर पति-पत्नी की जोड़ी ने इतिहास रचा, वहीं दूसरी ओर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाली वार्ड संख्या 17 की ओटी देवी और वार्ड संख्या 18 के करण मेघवाल की दादी-पोते की जोड़ी को हार का सामना करना पड़ा।
दोनों ने भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा था, लेकिन मतदाताओं ने उन्हें जीत का आशीर्वाद नहीं दिया। इस परिणाम ने भी स्थानीय राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा बटोरी।
वार्ड 5 में दिग्गजों को लगा बड़ा झटका
वार्ड संख्या 5 का चुनाव परिणाम भी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश लेकर आया। भाजपा की पूर्व चेयरमैन को पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया। लेकिन चुनाव परिणाम में उनका प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा और वे महज 100 मतों तक सिमट गईं।
इसी वार्ड से भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरी हुली देवी चौधरी, जो पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष देवाराम चौधरी की धर्मपत्नी हैं, को भी मतदाताओं का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। उन्हें मात्र 73 मत प्राप्त हुए और वे तीसरे स्थान पर रहीं।
गौरतलब है कि देवाराम चौधरी वार्ड संख्या 5 से निवर्तमान पार्षद हैं। ऐसे में राजनीतिक रूप से मजबूत माने जाने वाले परिवार से जुड़े प्रत्याशी का इस तरह तीसरे स्थान पर रहना चुनाव के महत्वपूर्ण परिणामों में गिना जा रहा है।
वार्ड 22 में नाम वापसी के दिन बदले पूरे समीकरण
तखतगढ़ नगरपालिका का वार्ड संख्या 22 चुनाव के अंतिम चरण में सबसे ज्यादा चर्चित रहा। यहां टिकट को लेकर उपजे घटनाक्रम ने चुनावी तस्वीर ही बदल दी।
राजेश कुमावत ने अपनी पत्नी के लिए भाजपा से टिकट की मांग की थी, लेकिन पार्टी द्वारा उन्हें टिकट न देकर स्वयं राजेश कुमावत को टिकट दिए जाने के बाद राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया।
नाम वापसी के अंतिम दिन वार्ड में ऐसा समीकरण बना कि भाजपा, कांग्रेस सहित एक निर्दलीय प्रत्याशी ने भी अपना नाम वापस ले लिया। परिणामस्वरूप निर्दलीय प्रत्याशी शिल्पा कुमावत निर्विरोध निर्वाचित हो गईं।
नाम वापसी के अंतिम दिन हुआ यह घटनाक्रम तखतगढ़ नगरपालिका चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चाओं में शामिल रहा और इससे भाजपा को बड़ा झटका लगने की चर्चा चुनाव के बाद भी जारी रही।
भाजपा के मजबूत गढ़ों में कांग्रेस की सेंध
तखतगढ़ के वार्ड संख्या 15 और 19 लंबे समय से भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाते रहे हैं। इन वार्डों में कांग्रेस के लिए जीत दर्ज करना आसान नहीं माना जाता था।
लेकिन इस बार चुनाव परिणाम ने पुराने समीकरणों को बदल दिया। वार्ड 15 से कांग्रेस के सूरज वाल्मीकि और वार्ड 19 से अनराज मेवाड़ा ने जीत दर्ज कर भाजपा के मजबूत माने जाने वाले गढ़ों में सेंधमारी की।
इन परिणामों ने यह संकेत दिया कि तखतगढ़ की स्थानीय राजनीति में पारंपरिक रूप से मजबूत माने जाने वाले वार्डों में भी मतदाताओं का रुझान बदल सकता है।
वार्ड 9 का परिणाम भी रहा रोमांचक
वार्ड संख्या 9 का चुनाव परिणाम भी काफी रोचक रहा। यहां कांटे की टक्कर के बाद बराबर मतों की स्थिति बनी और अंततः लॉटरी प्रक्रिया के जरिए परिणाम भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में गया।
इस तरह यह वार्ड भाजपा के खाते में गया, लेकिन परिणाम ने मुकाबले की नजदीकी को भी सामने ला दिया।
कई वार्डों में बेहद कम अंतर से जीत
इस बार तखतगढ़ नगरपालिका के कई वार्डों में मुकाबला बेहद नजदीकी रहा। कुछ वार्डों में भाजपा प्रत्याशी इकाई अंक के अंतर से जीत दर्ज करने में सफल रहे। इससे साफ है कि कई वार्डों में मतदाताओं का फैसला बेहद करीबी रहा और कुछ दर्जन या उससे भी कम मतों ने जीत-हार का अंतर तय किया।
ऐसे परिणामों ने यह भी दिखाया कि इस चुनाव में किसी भी प्रत्याशी के लिए जीत को आसान नहीं माना जा सकता था।
वार्ड 12 में भाजपा की कोशिशों के बावजूद कांग्रेस का परचम
चुनाव के सबसे चर्चित मुकाबलों में वार्ड संख्या 12 भी शामिल रहा। इस वार्ड को लेकर भाजपा ने चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंकी। मुकाबले को लेकर शुरुआत से ही राजनीतिक हलकों में विशेष चर्चा थी।
लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भंवर मीना ने मतदाताओं के समर्थन से शानदार जीत दर्ज की और वार्ड 12 पर अपना कब्जा बरकरार रखा।
भाजपा की तमाम चुनावी रणनीतियों और प्रयासों के बावजूद भंवर मीना को हराने में सफलता नहीं मिली। परिणाम के बाद वार्ड 12 की जीत कांग्रेस समर्थकों के बीच विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है।
बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत
तखतगढ़ नगरपालिका चुनाव 2026 के परिणामों को केवल जीत-हार के आंकड़ों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। इन परिणामों ने स्थानीय राजनीति में बदलते समीकरणों की तस्वीर भी सामने रखी है।
एक ओर जहां कुछ नए चेहरे मजबूत होकर उभरे हैं, वहीं दूसरी ओर वर्षों से राजनीति में प्रभाव रखने वाले कई चेहरों को मतदाताओं ने नकार दिया। कहीं राजनीतिक परिवारों का प्रभाव काम आया तो कहीं उसी प्रभाव को मतदाताओं ने स्वीकार नहीं किया।
पति-पत्नी की ऐतिहासिक जीत से लेकर दादी-पोते की हार, पूर्व चेयरमैन की बगावत के बावजूद सीमित मत, राजनीतिक परिवारों को लगा झटका, वार्ड 22 में निर्विरोध जीत और भाजपा के मजबूत गढ़ों में कांग्रेस की सेंध—इन सभी घटनाक्रमों ने तखतगढ़ नगरपालिका चुनाव 2026 को यादगार बना दिया है।
अब इन परिणामों के बाद तखतगढ़ की स्थानीय राजनीति में नए समीकरण किस रूप में आकार लेते हैं और निर्वाचित पार्षदों की भूमिका आने वाले समय में किस तरह सामने आती है, इस पर पूरे कस्बे की नजर रहेगी।


