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तखतगढ-विलुप्त होती सदियों से चली आ रही परंपरा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में जीवित हैग्रहणियों ने धनतेरस पर खेतों से मिट्टी और पीला सोना रूपी आवल के फूल धन लेकर पहुंचीं घर

Pintu Aggarwal by Pintu Aggarwal
November 6, 2026
in Local
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तखतगढ-विलुप्त होती सदियों से चली आ रही परंपरा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में जीवित हैग्रहणियों ने धनतेरस पर खेतों से मिट्टी और पीला सोना रूपी आवल के फूल धन लेकर पहुंचीं घर

PALI SIROHI ONLINE

खीमाराम मेवाडा

विलुप्त होती सदियों से चली आ रही परंपरा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में जीवित हैग्रहणियों ने धनतेरस पर खेतों से मिट्टी और पीला सोना रूपी आवल के फूल धन लेकर पहुंचीं घर

तखतगढ 6 नवंबर (खीमाराम मेवाडा) बदलते युग दौर में भी पश्चिमी राजस्थान मे आज भी विलुप्त होती सदियों से चली आ रही परंपरा ग्रामीण क्षेत्रों में जीवित है। कि शुक्रवार को ग्रहणियों ने धनतेरस पर्व पर खेतों से मिट्टी और पीला सोना रूपी आवल के फूल धन लेकर घर पहुंचीं। इसी सदियो पुरानी परंपरा के अनुसार ग्रहणीयां गोबर, मिट्टी और पीला फूलो की पूजा कर घर आंगन को शुद्ध बनाती थी। लेकिन बदलते युग एव आधुनिक तकनीकी के दौर मे मकानो का पक्का निर्माण होने एव शिक्षा के जगत में आमदनी से सक्षम होकर सोना चांदी खरीद ने की परम्परा शुरू होने के बाद सदियो की परम्परा अब विलुप्त हो रही है।

खेतों से मिट्टी और पीला सोना रूपी आवल के फूल धन लेकर पहुंचीं घर

शुक्रवार को धनतेरस पर्व के अवसर पर सूर्योदय से पूर्व हर घर की ग्रहणीयां एवं युवतियां कुमकुम, अगरबत्ती सहित पुजा सामग्री लेकर खेतो मे पहुंच धरती माता को गैहु अर्पित कर तिलक लगाकर दीप प्रज्ज्वलित के साथ पुजा अर्चना कर खेत की मिट्टी को बर्तन मे भरकर बिच मे सोना रूपी आवल के पीले फूल सजाकर झुंड के साथ घर पहुंचकर धन के रूप मे पुजन कर वर्षों पुरानी परंपराएं की पहचान बना रही हैं। इसी प्रकार क्षेत्र के आसपास सांडेराव, दुजाना,बलाना, नोवी, बांंकली सहित ग्रामीण क्षेत्रो में भी यह परंपरा उत्साह के साथ निभाई गई।

क्या कहते है बुजुर्ग
धनतेरस के अवसर पर खारचियावास निवासी बुजुर्ग वरदाराम घांची का कहना है। कि सतयुग मे लोगो के पास पैसे नही थे और गरीबी ज्यादा थी। एक,दो,पांच और 20 पैसे चलन मे थे। धनतेरस के दिन खेतो की मिट्टी और सोना रूपी आवल के फूलो की पुजा करते थे। लेकिन अब जैसे युग बदला लोगो के पास पैसा होने से अब सोना चांदी खरीदकर धन की पुजा करते है। लेकिन पहले असली धन खेत की मिट्टी ही माना जाता था।

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