लेटा गाव के 800 साल पुराना अति प्राचीन श्री सांचोपा श्री आशापुरा माताजी के जिर्णोद्धार युक्त नवनिर्मित शिखरबद्ध मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 21 से 23 अप्रैल को
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खीमाराम मेवाडा
लेटा गाव के 800 साल पुराना अति प्राचीन श्री सांचोपा श्री आशापुरा माताजी के जिर्णोद्धार युक्त नवनिर्मित शिखरबद्ध मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 21 से 23 अप्रैल को
दुल्हन की तरह सजाया जा रहा लेटा गांव
तखतगढ 18 अप्रेल (खीमाराम मेवाडा) आहोर उपखंड क्षेत्र लेटा नगर की पुण्य भूमि पर 800 साल पुराना अति प्राचीन श्री सांचोपा श्री आशापुरा माताजी के जिर्णोद्धार युक्त नवनिर्मित शिखरबद्ध मंदिर की संरक्षक श्री श्री 1008 मंहत स्वामी रणछोड़ भारतीजी महाराज लेटा सहित जोधपुर संभाग स्तरीय कई संत महापुरुषो के पावन सानिध्य एव आशीर्वाद एव साँचोपा आशापुरा माताजी, मंदिर ट्रस्ट मंडल एवं समस्त ग्रामवासी लेटा के संयुक्त तत्वावधान मे 21 से 23 अप्रेल तक तीन दिवसीय भव्याऋतभव्य प्राण- प्रतिष्टा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है तीन दिवसीय ऐतिहासिक आयोजन को लेकर सम्पूर्ण लेटा गाव को दुल्हन की तरह रंग बिरंगी लाइट डेकोरेशन और रोशनी से सजावट कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो गई है।
यह होगे त्रि-दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव मांगलिक कार्यक्रम
प्रथम दिवस
महोत्सव के मंगलकार्य के प्रथम दिवस 21 अप्रेल को महोत्सव मंगल प्रारंभ, पंचांग पूजन शोभा यात्रा (जलयात्रा) प्रसादी, यज्ञ कार्य, सायन पूजन, महा आरती शाम की प्रसादी भक्ती संध्या (मेहन्दी वितरण)
द्वितीय दिवस
आनन्दकारी बुधवार 22 अप्रेल प्रातः पूजन, धान्याधिवास, महा अभिषेक, प्रसाद वास्तु सुबह-शाम प्रसादी कला न्यास शान्तीक-पौष्टिक होम, बडी सांझी महा आरती, भक्ति संध्या
तृतीय दिवस
पावन प्रतिष्ठा कल्याणकारी गुरूवार, 23 अप्रेल को मोबण स्थापन, तोरण वंदन, प्रतिमा प्रवेश, प्रतिमा स्थापन, प्रतिष्ठा,, प्राण प्रतिष्ठा, भोग अप्रर्ण, ध्वजारोहण, खीर पाक , भक्ति संध्या एवं महाआरती के साथ फले चुन्दडी का आयोजन होगा।
यह होगे प्रतिष्ठा महोत्सव के सम्मनीय अतिथि
प्रतिष्ठा महोत्सव के सम्मनीय अतिथि जोगेश्वर गर्ग मुख्य सचेतक राजस्थान सरकार, लुम्बाराम चौधरी सांसदः जालोर सिरोही, ओटाराम देवासी राज्य मंत्री,जोराराम कुमावत कैबिनेट मंत्री, छगनसिंह राजपुरोहित विधायक आहोर, पुखराज पाराशर पूर्व मंत्री, प्रदीप के गावडे जिला कलेक्टर, जालोर, शैलेंद्रसिंह इन्दोलिया पुलिस अधीक्षक, जालोर
सहित कई हसतिया मौजूद रहेगी।
यह है ग्राम लेटा का संक्षिप्त इतिहास
राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि मरुधरा जालौर स्वर्णगिरि की छत्रछाया में स्थित लेटा गांव का प्राचीन नाम लोष्टवती नगरी था जो कालान्तर में अपभ्रंश होकर लेटा नगर हो गया। इस गांव का इतिहास 800 वर्ष से अधिक प्राचीन है। बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि सर्वप्रथम श्री सांचोपा माताजी कोली ट्रंक से आकर यहां बिराजी थी। उस समय गांव के गुरोसा – परिवार जनों ने जैन-साहित्य के अध्ययन हेतु एक विद्यालय का संचालन शुरू किया। कहते हैं कि यहां पढ़ने के लिए दूर-दूर से साधु-साध्वी, संत, विद्यार्थी एवं श्रावक आते थे। यहां जाप-ध्यान-तप से इस धरा को पावन करते थे।
कालांतर में आज से करीब 600 वर्ष पूर्व नाडोल के राव लाखणसी चौहान के पुत्र दूदा की 17वीं पीढ़ी में राव वेरसन ने लेटा गांव को अपनाया और अपनी जाति के पांच अन्य चौहान परिवार सहित आकर तालाब खुदवाकर, मां सांचोपा के पास मां आशापुरा को स्थापित कर इस गांव में बसे । राव दूदा को उनके पिता राव लाखणसी जी चौहान ने भण्डार कार्य सौंपा था। इस कारण उनके वंशज भण्डारी कहलायें।
लेटा गांव मारवाड़ की रियासत में था। पर महाविद्यालय होने के कारण जोधपुर-दरबार (महाराजा) ने अपनी अधीनता में नहीं रखा। इस गांव को ‘खालसा’ घोषित किया। जिसका अर्थ होता है जिसका कोई ठाकुर नहीं।
यहां की भूमि सिंह भूमि है। मां के दरबार में आकर जो भी मनोकामना करते हैं। परिपूर्ण होती है। ग्रामवासियों के लिए मां का यह दरबार श्रद्धा और आस्था का केन्द्र बिन्दु है। काफी परिवार एक निश्चित तिथि को दीपक करते हैं। मां की असीम कृपा सब पर बरस रही है। अनेक बार मां के चमत्कार हुए हैं।
