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खीमाराम मेवाडा
पत्रकार हितों को लेकर विधायक एवं केबिनेट मंत्री को ज्ञापन सौपा
तखतगढ 12 अगस्त (खीमाराम मेवाडा) IFJWA विधानसभा प्रभारी गौरीशंकर वैष्णव सुमेरपुर की अगुवाई एवं उपखण्ड अध्यक्ष नारायण डाबी के सानिध्य में बुधवार को पत्रकार साथियों ने पत्रकार हितों को लेकर विधायक एवं केबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत को ज्ञापन दिया।
ज्ञापन मे बताया कि (इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स) 1950 से स्थापित देश का प्रथम, अग्रणी, प्रामाणिक एवं विशालतम पत्रकार संगठन है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकार समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज़ को शासन तक पहुंचाने, जनहित के मुद्दों को उजागर करने तथा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने का महत्व दायित्व निभाते हैं। किन्तु वर्तमान समय में निष्पक्ष एवं निर्भीक पत्रकारिता करने वाले कलमकारों को धमकियों, झूठे मुकदमों, शारीरिक हमलों एए मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
इसके साथ ही, अधिस्वीकरण की जटिल व व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण ग्रामीण व उपखंड स्तर के अनेक सक्रिय एवं वास्तविक पत्रकार सरकारी मान्यता एवं कल्याणकारी लाभों से वंचित रह जाते हैं। आप हमारे क्षेत्र के सजग, लोकप्रिय एवं दूरदर्शी जनप्रतिनिधि हैं। लोकतंत्र की रक्षा और पत्रकारों के सम्मान के प्रति आपकी प्रतिबद्धता सर्वविदित है। प्रदेश का संपूर्ण पत्रकार जगत आपसे अपेक्षा करता है। कि आप हमारी निम्नलिखित न्यायोचित मांग का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री को अपने आधिकारिक लेटरहेड पर अनुशंसा पत्र जारी करेंगेः
- राजस्थान में शीघ्र-अति-शीघ्र कड़ा ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ (Journalist Protection Act) लागू किया जाए तथा पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज करने से पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा निष्पक्ष जांच अनिवार्य की जाए।
- जटिल नियमावली का पुनरीक्षण कर ग्रामीण, तहसील व जिला स्तर के सक्रिय पत्रकारों को सरलीकृत एवं पारदर्शी प्रक्रिया से अधिस्वीकरण का लाभ दिया जाए।
- प्रदेश के हजारों पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले विशालतम संगठन ‘आईएफडब्ल्यूजे राजस्थान को राज्य स्तरीय अधिस्वीकरण समिति (Accreditation Committee) तथा अन्य सभी पत्रकार कल्याण समितियों में स्थायी एवं सम्मानजनक प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए।
- पत्रकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा एवं आपातकालीन सहायता हेतु पत्रकार संगठनों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर नीतिगत निर्णय लिए जाएं।


