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सिरोही-राजस्थान एम्बुलेंस कर्मचारी यूनियन ने सिरोही शिवगंज विधायक और राज्य मंत्री ओटा राम देवासी को एक ज्ञापन सौंपा है। यूनियन ने एम्बुलेंस कर्मचारियों को नियमों में शामिल करने और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) से उनके नाम जारी करने की मांग की है।यूनियन अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह देवड़ा की अगुआई में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि 108 और 104 एम्बुलेंस सेवाओं में कार्यरत पायलट पिछले 15 से 17 साल से लगातार आपातकालीन सेवाएं दे रहे हैं। ये सेवाएं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राजस्थान सरकार द्वारा संचालित की जा रही हैं। इन कर्मचारियों ने हर आपदा, महामारी और विषम परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर जन सेवा की है।
यूनियन ने बताया कि वर्ष 2022 में जोधपुर न्यायालय ने 108 और 104 एम्बुलेंस ड्राइवरों के पक्ष में निर्णय दिया था। इसके बावजूद, आज तक न तो उन्हें 2022 के नियमों में शामिल किया गया है और न ही हाई कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन किया गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि राजस्थान सरकार द्वारा संविदा, निविदा, यूटीबी, एचएम प्लेसमेंट एजेंसी और ठेका प्रथा के तहत कार्यरत उन कर्मचारियों की स्कैनिंग और सत्यापन प्रक्रिया मांगी गई है, जिनकी सेवा अवधि 5 से 10 वर्ष या उससे अधिक है। इस प्रक्रिया में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को शामिल किया गया है।हालांकि, एम्बुलेंस 108 और 104 सेवाओं में कार्यरत ड्राइवर, जो 15 से 17 साल से निरंतर सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है। यूनियन का कहना है कि यह स्थिति गंभीर भेदभाव को दर्शाती है और कर्मचारियों के साथ अन्याय है, जो प्रतिदिन जीवन रक्षक और आपातकालीन सेवाएं प्रदान करते हैं। समान प्रकृति की सेवा देने वाले अन्य ठेका एवं प्लेसमेंट कर्मचारियों को स्कैनिंग में शामिल करना और एम्बुलेंस कर्मचारियों को बाहर रखना न्यायसंगत नहीं है।
यूनियन ने बताया कि उनकी फाइल वित्त मंत्री दिया कुमारी को सौंप दी गई है। उनके प्रतिनिधिमंडल लगातार सक्रिय रहकर प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस परिणाम प्राप्त नहीं हुआ है, जिससे निराशा हुई है। यूनियन ने यथाशीघ्र न्याय दिलाने की मांग की है।

