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सिरोही-राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी मामले में 9 जुलाई और 28 जुलाई को दिए आदेशों के कानूनी दायरे को लेकर स्थितियां स्पष्ट होने लगी हैं।
नीलामी क्रेता पहल इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पैरर्व पैरवी कर रहे अधिवक्ता अर्पित भूत द्वारा न्यायालय के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 9 जुलाई एवं 28 जुलाई के अपने आदेशों में पूर्व में लिक्विडेटर द्वारा विधिवत संपन्न की जा चुकी किसी भी वैधानिक नीलामी, विक्रय प्रमाण-पत्र अथवा राजस्व नामांतरण पर कोई विशिष्ट स्थगन आदेश पारित नहीं किया है, साथ ही, जिन मूल अटैचमेंट आदेशों के आधार पर उक्त नीलामी की थी, उन्हें आजतक किसी सक्षम न्यायालय के समक्ष चुनौती नहीं दी है और वे प्रभावी हैं। न्यायालय ने यह भी निर्देशित किया है कि जिन संपत्तियों का अब तक परिसमापन नहीं हुआ है, उनकाविधि के अनुसार परिसमापन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट के आदेश का मूल उद्देश्य पूर्व प्रबंधन या आरोपियों को सोसायटी की संपत्तियों में कोई नया थर्ड पार्टी अधिकार बनाने से रोकना है, न कि लिक्विडेटर द्वारा पूर्व में नियमतः निष्पादित की जा चुकी नीलामी प्रक्रियाओं को बाधित करना।
दूसरी ओर, नीलामी में सिरोही स्थित संपत्ति (खसरा संख्या 1052) खरीदने वाली कंपनी पहल इंफ्रास्ट्रक्चर के निदेशक नरेंद्रसिंह के अनुसार, ‘हाईकोर्ट द्वारा 9 जुलाई को दिया गया ‘स्टेटस को’ का आदेश केवल आरोपी याचिकाकर्ताओं के खिलाफ है। पहल इंफ्रा ने यह संपत्ति किसी आरोपी से नहीं, बल्कि लिक्विडेटर की अधिकृत नीलामी के जरिए खरीदी है। इस पर किसी प्रकार का स्टे प्रभावी नहीं है।’


