गौतम ऋषि का मेला, चार किलोमीटर क्षेत्र में फैला,15 को होगा विसर्जन
PALI SIROHI ONLINE
शिवगंज-जिले के चोटिला के पास स्थित गौतम ऋषि महादेव मंदिर परिसर में लगने वाला मीणा समाज का प्रसिद्ध गौतम ऋषि मेला 14 अप्रैल को भरेगा। 13 अप्रैल से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो जाएगा, जबकि 15 अप्रैल शाम को मेले का विसर्जन होगा। मीणा समाज इस मेले को आस्था और परंपरा के पर्व के रूप में मनाता है, जहां श्रद्धालु अपने आराध्य देव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
पश्चिमी राजस्थान के बड़े मेलों में शामिल यह आयोजन समाज की परंपराओं और अनुशासन का अनूठा उदाहरण है। मेले की पूरी व्यवस्था मीणा समाज की मेला कमेटी और पंचों के हाथ में रहती है। खास बात यह है कि यहां तैनात पुलिसकर्मी भी वर्दी में नजर नहीं आते, हालांकि कानून-व्यवस्था और यातायात के लिए व्यापक पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है।
4 किमी क्षेत्र में फैलेगा मेला, गुजरात से भी आएंगे श्रद्धालु :
हर वर्ष सुकड़ी नदी के किनारे करीब 4 किलोमीटर क्षेत्र में लगने वाले इस मेले में 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ-साथ गुजरात से भी बड़ी संख्या में समाजजन यहां पहुंचते हैं। मेले की व्यवस्थाएं गौतम ऋषि ट्रस्ट और समाज के पंचों की देखरेख में परगना स्तर पर बांटी गई जिम्मेदारियों के अनुसार संचालित होती है
किंवदंती: गौतम ऋषि की तपोभूमि से जुड़ा मेला
मान्यता के अनुसार, यह स्थल गौतम ऋषि की तपोभूमि रहा है। कहा जाता है कि गांगुआजी महाराज की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इस स्थान को “गौतम ऋषि महादेव” के नाम से प्रसिद्ध होने का वरदान दिया और वैशाखी नक्षत्र में मेला लगने की परंपरा शुरू हुई। इसी आस्था के चलते यहां मेष संक्रांति पर मेला आयोजित होता है।
परंपरा और बदलाव का अनोखा संगम है यहां समय के साथ मेले का स्वरूप बदला है। पहले जहां लोग बैलगाड़ियों से आते थे, वहीं अब ट्रैक्टर-ट्रॉली और चारपहिया वाहनों से पहुंचते हैं। बावजूद परंपराएं जीवित हैं। समाजजन एताईयों पर रोट बना चूरमा तैयार करते हैं और महिलाएं मंगल गीत गाते मंदिर पहुंचकर आराध्य देव को भोग लगाती है

