• May 15, 2026

तखतगढ-देश की आजादी के 70 से अधिक वर्ष गुजर ने बाद भी जोधपुर रेल मंडल की निरंतर उपेक्षा का शिकार बनता समदड़ी-भीलड़ी रेलखण्ड

PALI SIROHI ONLINE

खीमाराम मेवाडा

देश की आजादी के 70 से अधिक वर्ष गुजर ने बाद भी जोधपुर रेल मंडल की निरंतर उपेक्षा का शिकार बनता समदड़ी-भीलड़ी रेलखण्ड

रेल मंत्री के गृह क्षेत्र में जालोर फालना मार्ग का करोड़ों खर्च तीन बार सर्वे, काम आज तक शून्य हैं

तखतगढ 15 मई (खीमाराम मेवाडा) देश की आजादी के 70 से अधिक वर्ष गुजर ने बाद भी उत्तर पश्चिम रेलवे के समदड़ी-भीलड़ी रेलखण्ड आज भी जोधपुर रेल मंडल की निरंतर उपेक्षा का शिकार बनता जा रहा है। क्षेत्र के प्रवासी  यात्रीयो की सुविधाओं के विस्तार को लेकर पैसेंजर यात्री गादी संघर्ष समिति के अध्यक्ष एव वरिष्ठ आरटीआई सामाजिक कार्यकर्ता हीराचंद भंडारी देश के प्रधानमंत्री एवं भारत सरकार के रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड नई दिल्ली के अध्यक्ष को पत्र भेज कर अवगत कराया की हम यह पत्र अत्यंत क्षोभ और मारवाड की जनता की उस गहरी पीडा के साथ लिख रहे हैं। जिसे हम वर्षों से सहते आ रहे हैं। भारत की आजादी के 70 से अधिक वर्ष बीत जाने के बाद भी ‘जोधपुर रेल मण्डल’ की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है। कि इस क्षेत्र को जानबूझकर विकास की मुख्यधारा से काट दिया गया है। जिस मे विशेषकर समदड़ी-भीलड़ी रेलखण्ड की उपेक्षा अब असहनीय होती जा रही हैं। रेल मंत्री जी आप स्वयं राजस्थान की मिट्टी से आते हैं। और जोधपुर आपका ‘होम डिविजन’ भी हैं। इसलिये हमारी आशाएं आप से स्वाभाविक रूप से बहुत अधिक हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि आज हमें अपने ही क्षेत्र के मंत्री से अपना हक भी कड़े शब्दों में मांगना पड़ रहा हैं। हम इन बिन्दुओं के माध्यम से आपका ध्यान इस बदहाली की और खींचना चाहते हैं।

क्षैत्रीय असंतुलनः

भंडारी का उल्लेखन है कि आज पुरा देश जानता है कि जिस क्षेत्र के रेलमंत्री रहे हैं, वहाँ रेल मार्गों का जाल बिछ गया। उदाहरण के तौर पर बिहार को ही देख लीजिए, जहाँ हर दस किलोमीटर के दायरे में रेलमार्ग उपलब्ध हैं। क्या मारवाड़ की जनता को सिर्फ इसलिये उपेक्षित रखा जा रहा है कि हम धैर्यवान हैं? क्या हमारे क्षेत्र को वह प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिये जो अन्य रेलमंत्रियों ने अपने क्षेत्रों को दी ?

अत्यधिक यात्रीभार और वेटिंग का संकटः

उन्होंने बताया कि समदडी-भीलडी खंड पर यात्रीभार का दवाब इतना अधिक हैं कि हर गाडी में महीनों लंबी वेटिंग रहती हैं, जो किसी भी हाल में कर्फम नहीं होती। आखिर इस रूट पर नई गाड़िया चलाने में रेलवे को क्या अडचन है।

प्रवासियों की असुरक्षित यात्राः

इस क्षेत्र के लाखों व्यवसाई दक्षिण भारत में व्यापार करते हैं सीधी रेल सेवा न होने के कारण वे निजी बसों और वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हैं। ये सफर न केवल खर्चिला हैं बल्कि जानलेवा भी है आए दिन हमारे प्रवासी भाई सडक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं क्या हमारे प्रवासियों की सुरक्षा रेलवे की प्राथमिकता में नहीं हैं।

सर्वे के नाम पर करोड़ो खर्च और आश्वासनः

24 वर्षों से फाइलों में अटका जालोर फालना मार्ग का तीन बार सर्वे हुआ और काम आज तक शून्य हैं। इस सर्वे में करोड़ो रूपये खर्च हुए। पिछले एक वर्ष से पाली जालौर प्रवासियों की मांग के अनुसार लगातार समाचार प्रकाशित हो रहे हैं। आखिर पाली जालौर के प्रवासियों के साथ इतना अन्याय कब तक होता रहेगा। ऐसे मे अब जालोर आबूरोड़ के चर्चे हो रहे हैं। बालोतरा-जैसलमेर, समदड़ी-फलोदी और बाड़मेर-सांचोर-गुजरात कनेक्टिविटी की योजनाएं ठण्डे बस्ते में चली गई हैं। क्या हमें केवल ‘सर्वे’ की खबरों से ही संतोष करना पड़ेगा ?

मंत्रीजी, आप पुरे देश के रेलमंत्री हैं, लेकिन अपनी जड़ों और अपने घर की उपेक्षा करना न्यायसंगत नहीं है। नए रूट बनवाना हमारे लिए आप की बड़ी सौगात होगी, लेकिन जो ट्रैक अभी उपलब्ध हैं, उन पर गाड़ियों की संख्या तत्काल बढ़ाना हमारा वाजिब हक है। हमें आपसे ही उम्मीद हैं क्यों कि ऐसा मौका शायद दोबारा न मिले। यदि आपके स्थानीय मंत्री रहते हुए भी हमें अनदेखा किया गया, तो इस क्षेत्र की जनता की उम्मीदें हमेशा के लिए टूट जाएंगी। हमें आशा हैं कि आप अपनी ‘होम डिवीजन’ की इस सिसकती व्यवस्था पर ध्यान देकर जल्द ही ठोस कार्यवाही करावे।

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